दुर्घटना के मामलों में समय पर सूचना और सटीक अनुसंधान अत्यंत जरूरी है : पीडीजे

जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) द्वारा शनिवार को व्यवहार न्यायालय में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.

प्रतिनिधि, सिमडेगा

जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) द्वारा शनिवार को व्यवहार न्यायालय में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उदघाटन प्राधिकार अध्यक्ष सह प्रधान जिला जज राजीव कुमार सिन्हा, एडीजे नरंजन सिंह, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद, चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने दीप जला कर किया. कार्यशाला में पीडीजे राजीव कुमार सिन्हा ने दुर्घटना मामलों में त्वरित कार्रवाई, पारदर्शिता और सभी विभागों की समन्वित भूमिका पर विशेष जोर दिया. अपने संबोधन में पीडीजे ने कहा कि सड़क दुर्घटना के मामलों में समय पर सूचना और सटीक अनुसंधान अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने परिवहन विभाग को बीमा जांच के लिए सघन वाहन जांच अभियान चलाने का सुझाव दिया और कहा कि वाहनों में अनाधिकृत नेम प्लेट लगाने पर भी सख्ती से कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने गुड सेमेरिटन (सहायता करने वाले व्यक्ति) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पीएलवी और पुलिस बल के जवान इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटना से जुड़े मामलों में पीड़ित के अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि और चोटों की गंभीरता की गहन समीक्षा की जानी चाहिए. पीएलए के अध्यक्ष रमेश कुमार श्रीवास्तव ने चोट से जुड़े मामलों में मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम के अंत में खुली चर्चा आयोजित की गयी. जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्न और सुझाव रखे. धन्यवाद ज्ञापन सहायक एलएडीसीएस सुकोमल ने किया.

यातायात नियमों के प्रति जागरूक होना जरूरी

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरंजन सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटना किसी के साथ भी हो सकती है, इसलिए समाज के हर वर्ग को यातायात नियमों के प्रति जागरूक होना जरूरी है. उन्होंने बताया कि नाबालिग द्वारा वाहन चलाने पर वाहन मालिक के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान है. चीफ एलएडीसीएस प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने गोल्डन आवर की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद का समय जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने कहा कि घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को पुलिस द्वारा गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, इसलिए लोगों को निसंकोच आगे आकर मदद करनी चाहिए.

मुआवजा प्रावधानों की जानकारी दी

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामप्रीत प्रसाद ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि हिट एंड रन मामलों में मृत्यु होने पर दो लाख रुपये और घायल होने पर 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है. डीटीओ संजय कुमार बाखला ने वाहन चालकों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता पर जोर देते हुए बताया कि 16 वर्ष की आयु में बिना गियर वाले वाहन और 18 वर्ष की आयु में गियर वाले वाहन चलाने के लिए वैध लाइसेंस आवश्यक है. उन्होंने वाहन पंजीकरण,डीएआर और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी दी. अधिवक्ता शमीम अख्तर ने कहा कि कई दुर्घटनाओं में वाहनों की खराब लाइट भी एक कारण होती है .

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Vikash nath

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >