सम्मान समारोह का आयोजन.
रायडीह : रायडीह प्रखंड के जय किसान उच्च विद्यालय मांझाटोली में मैट्रिक व इंटर परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह व वर्ग 11वीं के विद्यार्थियों का स्वागत समारोह का आयोजन हुआ. मुख्य अतिथि गुमला धर्मप्रांत के अल्पसंख्यक विद्यालय के इंस्पेक्टर फादर जॉन अलबर्ट बाड़ा ने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए ईमानदार होना जरूरी है.
आज जिन छात्र-छात्राओं को सम्मान मिल रहा है, वह उनकी मेहनत का परिणाम है. आप अनुशासन में रह कर गुरुजनों व अभिभावकों की बात मान कर निरंतर आगे बढ़ते रहें. वहीं मैट्रिक व इंटर में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. सम्मानित होनेवालों में चांदनी कुमारी, तेजलाल गोप, संध्या कुमारी के अलावा नीतीश कुजूर, अर्चना बाड़ा, निशा कुमारी, नेहा कुमारी, रूबी खातून व मो आरिफ शामिल हैं. मौके पर एचएम फादर सिरील कुल्लू, फादर एडवर्ड लकड़ा, गिरजानंद पांडेय, रजनी लकड़ा, ज्योति व मुख्तार शाह सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं व अभिभावक मौजूद थे.
अनुश्रवण समिति की बैठक
गुमला. विकास भारती एवं सेभ द चिल्ड्रेन के करूणा परियोजना की जिलास्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक टीपीसी सभागार में हुई. जिसमें विगत दो माह में करूणा परियोजना के कार्यो की समीक्षा की गयी. विकास भारती ने बताया कि कुपोषण उपचार केंद्र में लाभार्थी की संख्या काफी कम है. जिसका मुख्य कारण एमटीसी में बच्चों की खेलने की जगह भी है. इस पर एमटीसी में चाइल्ड ब्रेनली बनवाने पर चर्चा की गयी. सेविका को घर घर जाकर कुपोषण को खत्म करने के लिए लाभार्थी को परामर्श द ेने व बच्चों के बाहुमाप लेने का निर्देश दिया गया.
प्रेसवार्ता आज
गुमला : शहर के मेन रोड स्थित होटल ज्योति में 26 जून को प्रेसवार्ता का आयोजन किया है. प्रेसवार्ता में गौतम सागर राणा, पूर्व विधायक मनिका रामचंद्र सिंह चेरो व पूर्व विधायक चतरा जर्नादन पासवान मौजूद रहेंगे. जानकारी राष्ट्रीय जनता दल के जिलाध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद साहू ने दी.
पदाधिकारी औचित्यविहीन टिप्पणी कर रहे हैं : अमित
गुमला. सदान मोरचा के जिला सचिव अमित सिंह ने कहा है कि झारखंड माध्यमिक बोर्ड व इंटर परीक्षा परिणाम 2016 को लेकर कथित शिक्षा विभाग के स्थानीय एवं उच्च स्तरीय विभागीय पदाधिकारी के औचित्य विहीन आदेश एवं टिप्पणी कर शिक्षक एवं कर्मियों के तबादले की बात कर अपना दायित्व से पल्ला झाड़ रहे हैं. राज्य सरकार भी एक काना बहरा की तरह इस घटिया सोच पर चुप्पी साधे हुए है. सभी जिलों के सरकारी व अल्पसंख्यक विद्यालयों के परिणाम निम्न स्तर का रहा है.
विद्यालय के शिक्षक एवं विद्यालय प्रशासन इसके लिए कैसे जिम्मेवार है. अगर वे है, तो क्या विभागीय पदाधिकारी इससे वंचित रहेंगे. अभिभावक व बच्चे इसके लिए जिम्मेदार नहीं है. एक सामंती व्यवस्था की तरह तुगलकी फरमान जारी कर विभाग अपने अधीनस्थ कर्मियों को दबाव में रख और भी घटिया स्तर में शिक्षा को ले जाने का प्रयास कर रही है.
