जलडेगा(सिमडेगा) : प्रत्येक वर्ष गरमी में धान की अच्छी उपज करने एवं अच्छी आय अर्जित करने वाले मनोहर कंडुलना को इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया. उन्होंने सोचा भी नहीं था कि इस बार पड़ने वाली प्रचंड गरमी उसकी किस्मत ही उजाड़ देगी.
अप्रैल माह में पड़ी भीषण गरमी ने उनका सारा सपना ही चूर कर दिया़ जिस कुआं से वह प्रत्येक वर्ष खेतों में सिंचाई करते थे, उस कुएं को इस भीषण गरमी ने सूखा दिया. मनोहर कंडुलना के पास सिंचाई की कोई और व्यवस्था नहीं है. परिणाम स्वरूप लगभग दो एकड़ में लगी धान की फसल सूख गयी. उन्होंने धान के अलावा सब्जी की भी खेती की थी.
उन्होंने झारखंड ग्रामीण बैंक से 20 हजार रुपये लेकर खेती की थी, किंतु फसल सूख जाने के बाद उनके समक्ष विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी है. वह अब बैंक का ऋण कैसे चुका पायेंगे, उनके लिये समस्या बन गयी है. उनके समक्ष भुखमरी की भी स्थिति उत्पन्न हो गयी. दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए वह साप्ताहिक हाट बाजारों में आइस क्रीम बेचने को विवश हैं. उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है.
