नेताजी, आपके ही क्षेत्र में है घाघरा

दुर्जय पासवान : नेताजी, घाघरा प्रखंड आपके ही क्षेत्र में है. इस प्रकार मुंह न मोड़ें. आपकी बेरुखी घाघरा में रहनेवाले लोगों के दिल को चोट पहुंचाती है. कभी आते हैं, तो जनता से भी मिलें. उनसे बात करें. उनका दुख-दर्द सुने. पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य की समस्या दूर करने के लिए ही जनता ने […]

दुर्जय पासवान : नेताजी, घाघरा प्रखंड आपके ही क्षेत्र में है. इस प्रकार मुंह न मोड़ें. आपकी बेरुखी घाघरा में रहनेवाले लोगों के दिल को चोट पहुंचाती है. कभी आते हैं, तो जनता से भी मिलें. उनसे बात करें. उनका दुख-दर्द सुने. पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य की समस्या दूर करने के लिए ही जनता ने आपको विधायक चुना है. लेकिन आपका रांची का मोह, घाघरा की जनता पर भारी पड़ रहा है.
घाघरा प्रखंड, जो कि बिशुनपुर विधानसभा में आता है. आज भी इस क्षेत्र की एक बड़ी आबादी विकास के रहनुमाओं का इंतजार कर रही है. क्योंकि जनता ने जिसे अपना समझ कर नेता बनाया. आज वे नेता जनता को भूल गये हैं. लोगों का कहना है. एक बड़ी आबादी से नेताजी नहीं मिलते हैं. न उनकी समस्या दूर करने की पहल कर रहे हैं.
जबकि घाघरा प्रखंड अकूत खनिज संपदाओं से भरा पड़ा है. घाघरा के एक हिस्से में भारी मात्रा में बॉक्साइड है. हिंडालको कंपनी बॉक्साइड का उत्खनन कर रही है. लेकिन जिनकी जमीन पर बॉक्साइड है. आज वे मजदूरी कर रहे हैं. जबकि कंपनी मालामाल हो रही है. जिन गांवों की जमीन को खोद कर बॉक्साइड निकाली जा रही है. उन गांवों में कंपनी को पानी, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, शिक्षा व रोजगार उपलब्ध कराना है. लेकिन गांव की जमीन पर पांव पड़ते ही सिर्फ समस्या नजर आयेगी.
कंपनी को जनता की जरूरतों से मतलब नहीं है. कुछ काम कंपनी जरूर दिखावे के लिए कर रही है. लेकिन उसका लाभ भी पहाड़ पर रहनेवाले लोगों को नहीं मिल पा रहा है. खनिज संपदा से परिपूर्ण घाघरा प्रखंड आज विकास की जिस बुलंदी पर होना चाहिए. उस बुलंदी पर नहीं है.
नेताजी (विधायक) की अनदेखी व रांची के मोह में वे घाघरा को भूल गये. देवाकी गांव में स्वास्थ्य केंद्र है. यह 10 सालों से बंद है.
गांव की जनता किसे फरियाद सुनाये. नेताजी का दर्शन नहीं है. अधिकारी अपने कार्य से भागते हैं. देवाकी गांव में ही जलमीनार आठ सालों से बेकार पड़ा है. लोग शुद्ध पानी मिलने के इंतजार में हैं. रूकीख दीरगांव, विमरला, कुगांव जाने का मार्ग जानलेवा है. लोगों ने कई बार आंदोलन किया. वोट बहिष्कार किया. नेताओं के घुसने पर रोक लगायी.
अधिकारियों को जनता दरबार में खरीखोटी सुनायी. इसके बाद भी इन गांवों में सड़क नहीं बन रही है. न ही जरूरत के अनुसार विकास के काम हो रहे हैं. खेल को बढ़ावा देने के लिए घाघरा में लाखों रुपये से स्टेडियम बना. नेताजी, यहां लगता है. कमीशन का खेल हुआ है. इसलिए जैसे-तैसे काम करा कर जनता के पैसों का बंदरबांट कर लिया गया.
तीन साल पहले बना स्टेडियम, आज तक बेकार है. अब तो जो पैसा स्टेडियम बनाने में खर्च हुई है. वह भी डूबता नजर आ रहा है. सरकार की नजर गांव के विकास पर है. लेकिन घाघरा के गांवों की जो स्थिति है. वह सिस्टम पर प्रहार करती है. गांवों में 14वें वित्त आयोग के मद से सोलर लाइट लगाया गया है. करोड़ों रुपये खर्च हुए. परंतु कई गांवों में सोलर लाइट लगते ही एक महीने में बेकार हो गया.
घाघरा प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है. करोड़ों रुपये की लागत से भवन बना है. लेकिन यह बेकार पड़ा है. कई अस्पताल है. जहां डॉक्टर नहीं जाते हैं. घाघरा उग्रवाद क्षेत्र है. यहां माओवादी, झांगुर गुट, जेजेएमपी, पीएलएफआइ है. हालांकि पुलिस दबिश के बाद माओवादी व पीएलएफआइ का उत्पात कम हुआ है. झांगुर गुट अपने इलाके से नहीं निकलता.
जेजेएमपी प्रभाव बढ़ा रहा है. ये संगठन लेवी के पैसों से चल रहा है. ठेकेदार डरे हुए हैं. क्योंकि बिना नजराना दिये ठेकेदारों को काम करने नहीं दिया जाता है. गुमला व लोहरदगा के बीच में स्थित इस प्रखंड का शहरी क्षेत्र अन्य प्रखंडों की तुलना में बड़ा है. मुख्यालय में घनी आबादी है. कई अच्छे दुकान है. लेकिन जो सुविधा मिलनी चाहिए.
दुकानदारों को नहीं मिल रही है. नेताजी, भी ध्यान नहीं दे रहे हैं. घाघरा में लंबे अरसे से अल्युमिनियम कारखाना की स्थापना की मांग हो रही है. जनता तो आंदोलन कर रही है. लेकिन नेताजी चुप बैठे हुए हैं. घाघरावासी कहते हैं. बदलाव से ही विकास की उम्मीद की जा सकती है.

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