अपनी जांच रिपोर्ट में एसडीओ ने कहा है कि दिन के एक बजे करण ने अपने बेटे सुमन को अस्पताल में भरती कराया. डॉक्टर ने सादे कागज में दवा लिख कर लाने के लिए कहा. करण दवा खरीदने अस्पताल से बाहर निजी दुकान गया, जहां दो दवा नहीं मिली. जब करण वापस आया, तो उसके बेटे की मौत हो गयी थी. करण ने बेटे के शव को गांव ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की, तो स्टाफ नर्स ने कहा कि निजी गाड़ी कर लो. वहां पास एक टेंपो चालक था. उसने कहा कि 2500 रुपये भाड़ा लगेगा. भाड़ा सुनने के बाद करण अपने बेटे को पीठ पर लाद कर बस से घर गया. जांच से स्पष्ट हुआ है कि दवा नहीं मिलने व ससमय इलाज के अभाव में सुमन सिंह की मौत हो गयी है.
उस समय अस्पताल में तीन एंबुलेंस था. चालक भी थे. इसके बावजूद अस्पताल द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया गया. एसडीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में अस्पताल के पूरे सिस्टम को दोषी ठहराया है. जांच रिपोर्ट में कई डॉक्टरों के नाम भी हैं. इधर, जांच रिपोर्ट को डीसी श्रवण साय ने कार्रवाई के लिए सरकार को भेज दिया है.
