खरसावां: उत्क्रमित उच्च विद्यालय कृष्णापुर में शनिवार को हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि और प्रतिभा की झलक देखने को मिली. 14 सितंबर को अवकाश रहने के कारण विद्यालय में दो दिन पहले ही हिंदी दिवस का विशेष आयोजन किया गया. प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों ने हिंदी के महत्व, बदलते दौर में इसकी उपयोगिता और रोजगार की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किये. इसके बाद क्विज और श्रुतिलेख प्रतियोगिता आयोजित की गयी, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
हिंदी सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं, रोजगार का भी माध्यम
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिंदी शिक्षक विश्वजीत कुमार सतपथी ने कहा कि हिंदी अब केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है. शिक्षा, मीडिया, अनुवाद, प्रकाशन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक के क्षेत्र में हिंदी रोजगार का मजबूत माध्यम बन रही है. विद्यार्थियों को हिंदी के शुद्ध प्रयोग के साथ आधुनिक तकनीक में भाषा की बढ़ती संभावनाओं को भी समझना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना और अपनी भाषा पर गर्व करना प्रत्येक विद्यार्थी की जिम्मेदारी है. उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के इतिहास और वर्तमान स्वरूप की जानकारी भी दी.
संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को दी थी राजभाषा की मान्यता
शिक्षक विश्वजीत कुमार सतपथी ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. आज हिंदी भारत के साथ दुनिया के कई देशों में बोली और समझी जाती है. डिजिटल दौर में भी हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इंटरनेट तथा तकनीक के क्षेत्र में इसके उपयोग के नये अवसर सामने आ रहे हैं.
छात्र देव प्रधान ने हिंदी को देश की प्रमुख संपर्क भाषाओं में से एक बताया. छात्रा मौसमी महतो ने भी हिंदी के महत्व पर अपने विचार रखे. छात्र सदानंद नायक ने हिंदी दिवस पर आधारित क्विज का संचालन किया.
श्रुतिलेख में मौसमी ने मारी बाजी, विजेताओं को मिला पुरस्कार
कक्षा छह से दसवीं तक के विद्यार्थियों के बीच आयोजित श्रुतिलेख प्रतियोगिता में कक्षा दस की मौसमी महतो ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. तनिष्क सिंह देव द्वितीय और कक्षा आठ के देव प्रधान तृतीय स्थान पर रहे. मौजूदा सत्र की तीसरी अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के दौरान अभिभावकों के हाथों विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया.
मौके पर प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार, नूतन रानी, महादेव मुंडा, प्रभा कुमारी, योगेंद्र महतो, गीता महतो, अमरीश पुरती, सुभाष चंद्र तांती समेत बड़ी संख्या में विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित थे.
