चांडिल. अनुमंडल कार्यालय सभागार में मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्पेशल रैपोर्टियर सुचित्रा सिन्हा की अध्यक्षता में बैठक हुई. इस दौरान चांडिल डैम के विस्थापितों ने वर्षों से लंबित अपनी मांगों और प्रशासनिक अनदेखी को लेकर नाराजगी जतायी.
वादों और हकीकत के बीच पीस रहे विस्थापित
विस्थापितों ने आरोप लगाया कि डैम निर्माण के समय किये गये वादे आज तक अधूरे हैं. उनकी 90 प्रतिशत जमीन जलाशय में समा चुकी है, फिर भी उन्हें उचित लाभ नहीं मिला. पुनर्वास स्थलों की स्थिति अत्यंत दयनीय है. कपाली ए और बी ब्लॉक में बाहरी लोगों का कब्जा है. क्षेत्र में बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है. कुकड़ू में सामुदायिक भवन को गोदाम बना दिया गया है, वहीं चिलगु में श्मशान घाट तक को बेचने का आरोप लगा है. बैठक में ईचागढ़ क्षेत्र के विस्थापितों के लिए विकास पुस्तिका बनाने और नए सदस्यों के नाम जोड़ने की मांग उठी. साथ ही, पालना जलाशय के पानी को सिंचाई के बजाय उद्योगों को दिए जाने की जांच और घायल विस्थापित युवक चंपई मांझी के लिए मुआवजे की मांग भी की गयी. सभी पक्षों को सुनने के बाद अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिये. मौके पर रवींद्र नाथ गगराई, एसडीओ विकास कुमार राय, बीडीओ तालेश्वर रविदास, सीओ प्रदीप कुमार महतो, सुवर्णरेखा बांध प्रमंडल चांडिल के कार्यपालक अभियंता, पुनर्वास पदाधिकारी, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता, टाटा कंपनी के सीएसआर प्रतिनिधि, पंचायत के मुखिया, विभिन्न गांव के विस्थापित उपस्थित थे.