Seraikela Kharsawan News : 15 दिनों में हाथियों ने ली तीन की जान

पिछले एक दशक में चांडिल वन क्षेत्र हाथियों के उत्पात का मुख्य केंद्र बन गया है.

खरसावां/चांडिल. झारखंड राज्य गठन के बाद से ही सरायकेला वन प्रमंडल जंगली हाथियों से प्रभावित रहा है. पिछले एक दशक में चांडिल वन क्षेत्र हाथियों के उत्पात का मुख्य केंद्र बन गया है. बीते दो सप्ताह में हाथियों के हमले से तीन लोगों की मौत हो जाने से क्षेत्र में भय का माहौल है. 11 अप्रैल की सुबह चांडिल के सापारूम गांव में जंगली हाथी के हमले से राधा तंतुबाई (55) की मौत हो गयी थी. वहीं 25 अप्रैल को ईचागढ़ थाना क्षेत्र के सोड़ो पंचायत के हाड़ात गांव में चाइना देवी (35) और उनकी पुत्री अमिता कुमारी (13) की भी हाथी के हमले में जान चली गयी.

पिछले वर्ष भी दो लोगों की गयी थी जान :

वर्ष 2025 में भी हाथियों का आतंक कम नहीं हुआ था. 7 जून 2025 को नीमडीह प्रखंड के आंडा गांव की कुंती देवी और 9 दिसंबर 2025 को कुकड़ू प्रखंड के लेटेमदा गांव के गौरांग महतो की हाथी के कुचलने से मौत हो गयी थी.

रेंजर-फॉरेस्टर के पद रिक्त, वनपाल के भरोसे चल रहा चांडिल रेंज:

चांडिल वन क्षेत्र कार्यालय फिलहाल वनरक्षियों के भरोसे चल रहा है. एक रेंजर और चार फॉरेस्टर के पद रिक्त हैं. 16 वनरक्षियों के सहारे पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी निभायी जा रही है. इनमें से एक को प्रभारी वनपाल बनाया गया है, जबकि रेंजर का अतिरिक्त प्रभार घाटशिला के रेंजर को दिया गया है.

हाथी कॉरिडोर योजना फाइलों में अटकी

चांडिल से ओडिशा बॉर्डर तक हाथी कॉरिडोर में अवरोध के कारण हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ रहा है. कॉरिडोर विकसित करने की योजना अब तक फाइलों में ही उलझी हुई है. हालांकि, वन विभाग की ओर से गज परियोजना के तहत जल स्रोत विकसित करने के प्रयास किए गए हैं.

कई गांवों में हाथियों ने डाला डेरा

वर्तमान में ईचागढ़ के सोड़ो पंचायत क्षेत्र में पांच और नीमडीह के आंडा गांव में एक जंगली हाथी डेरा डाले हुए हैं. शाम होते ही गांवों में हाथियों की चिंघाड़ सुनायी देती है, जिससे लोग सहमे हुए हैं.

शाम ढलते ही बढ़ जाता है खतरा

हाथी शाम होते ही गांवों में घुसकर फसलों और संपति को नुकसान पहुंचा रहे हैं. आंडा क्षेत्र के हाथी दिन में चांडिल डैम में जलक्रीड़ा करते देखे जा रहे हैं. ग्रामीण मशाल लेकर हाथियों को खदेड़ने को विवश हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है.

हाथी भगाओ दस्ता भी बेअसर

गयाराम महतो के नेतृत्व में हाथी भगाओ दस्ता सक्रिय है और वन विभाग के सहयोग से हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर भगाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिली है.

सबसे ज्यादा प्रभावित गांव

चांडिल, नीमडीह, कुकड़ू और ईचागढ़ प्रखंड के कई गांव जैसे रसुनिया, हथिनादा, गांगुडीह, सुकसारी, बाना, जामडीह, गुंडा, डीटांड़, वनघर, लावा, आंडा, सिरुम, रूपरु, बांदाबीर, सापारुम, केन्दांआदा, सोड़ो, पिलीद और सालुकडीह सहित आसपास के क्षेत्र हाथियों से सबसे अधिक प्रभावित हैं.

ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

ग्रामीण भय के साये में जीने को विवश हैं. शाम होते ही लोग घरों से निकलना बंद कर देते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग हाथियों के आतंक को नियंत्रित करने में नाकाम रहा है. उन्होंने प्रशासन से निगरानी बढ़ाने और समय रहते चेतावनी प्रणाली लागू करने की मांग की है.

कोट

“कल रात पश्चिम बंगाल की ओर से चार-पांच हाथियों का झुंड ईचागढ़ में प्रवेश किया था. रात करीब 10 बजे पैइलंग गांव में हाथी देखा गया. सुबह करीब 4 बजे हाथी हाड़ात गांव पहुंचा, जहां यह दुखद घटना हुई. वन विभाग की ओर से मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि दी गयी है, जबकि घायलों को 10-10 हजार रुपये इलाज के लिए दिए गए हैं. शेष मुआवजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिया जाएगा.

– मुकेश कुमार महतो, प्रभारी वनपालB

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Published by: Atul pathak

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