जल-जंगल-जमीन पर मंडराया खतरा! MMDR के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा झामुमो, जानें पूरा प्लान

केंद्र सरकार के खनिज संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा 7 सितंबर को प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेगा। जानें पूरी जानकारी।

खरसावां. केंद्र सरकार के प्रस्तावित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ झामुमो ने कड़ा रुख अपना लिया है. पार्टी इस विवादास्पद विधेयक के विरोध में व्यापक सड़क आंदोलन की तैयारी में जुट गयी है. झामुमो केंद्रीय समिति के हालिया निर्णय के तहत राज्यभर में रणनीति को अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी गयी है.

पंचायत और बूथ स्तर तक चलेगा जन-जागरूकता अभियान

झामुमो जिलाध्यक्ष डॉ. शुभेंदु महतो ने सभी प्रखंड अध्यक्षों और सचिवों को आधिकारिक पत्र जारी कर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की है. पार्टी के निर्देशानुसार 31 अगस्त तक जिले के प्रत्येक प्रखंड की पंचायतों और बूथ स्तर तक सघन जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा.

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता को इस नए विधेयक के प्रावधानों और झारखंड के जल, जंगल, जमीन तथा राजस्व पर पड़ने वाले इसके प्रतिकूल प्रभावों से अवगत कराना है. स्थानीय कार्यकर्ताओं और संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों को इस जन-जागरण में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने का विशेष निर्देश दिया गया है.

सात सितंबर को सभी प्रखंड मुख्यालयों पर होगा धरना-प्रदर्शन

रांची के सोहराय भवन में 20 अगस्त को आयोजित केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक में लिए गए निर्णयों के तहत, सात सितंबर (सोमवार) को जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन और आम सभा का आयोजन किया जाएगा. झामुमो नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की यह नीतियां पूरी तरह जनविरोधी हैं.

प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने के लिए केंद्रीय व जिला समिति के पदाधिकारियों, वर्ग संगठनों, पंचायत और बूथ स्तर के सभी सक्रिय कार्यकर्ताओं को अपनी शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया है. पार्टी ने हुंकार भरी है कि झारखंड के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन पूरी एकजुटता के साथ सड़क पर उतरेगा.


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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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