सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Kharsawan News: भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें आधुनिक युग के साथ जोड़ने की दिशा में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है. ज्ञान भारतम् मिशन के तहत सरायकेला-खरसावां जिले में सदियों पुरानी पांडुलिपियों और हस्तलिखित दस्तावेजों का संरक्षण, डिजिटलीकरण और संधारण किया जाएगा.
75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों का होगा संरक्षण
इस अभियान के तहत कम से कम 75 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या धार्मिक महत्व की पांडुलिपियों को चिह्नित कर डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा. देशभर में एक करोड़ पांडुलिपियों को चिह्नित करने का लक्ष्य रखा गया है. इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नयी पहचान मिलेगी.
दस्तावेजों को मिलेगा डिजिटल रूप
पुरानी पांडुलिपियां भोजपत्र, ताड़पत्र, ताम्रपत्र, कागज, कपड़ा या धातु पर लिखी हो सकती हैं. इनमें धार्मिक ग्रंथ, साहित्य, चिकित्सा, गीत, वंशावली, गद्य और पद्य सहित विविध विषयों के दस्तावेज शामिल होंगे. डिजिटलीकरण से आने वाली पीढ़ियां भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जुड़ सकेंगी.
जिलास्तरीय समिति का गठन
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है. इसमें एसडीओ, डीइओ, डीपीआरओ, पंचायती राज पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागीय अधिकारियों को शामिल किया गया है.
संस्थानों से जुटाई जाएगी जानकारी
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने पिछले दिनों बैठक कर निर्देशित किया कि राज परिवारों, पुस्तकालयों, मंदिरों, मठों, चर्चों, गुरुद्वारों, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों तथा आम नागरिकों से समन्वय कर पांडुलिपियों की जानकारी एकत्र की जाए. साथ ही प्रमुख पर्यटन स्थलों और महाविद्यालयों से भी अभिलेख जुटाने को कहा गया है.
धरोहर देने वालों को मिलेगा सम्मान
जिला प्रशासन ने घोषणा की है कि पांडुलिपियों की जानकारी देने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा. साथ ही दस्तावेजों का स्वामित्व संबंधित व्यक्ति का ही रहेगा. केवल उनका डिजिटलीकरण कर सुरक्षित संरक्षण किया जाएगा. इच्छुक व्यक्ति या संस्था अपनी पांडुलिपियों की जानकारी जिला प्रशासन को उपलब्ध करा सकते हैं.
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