सरायकेला छऊ मुखौटे की अनोखी कला से रूबरू हुआ झारक्राफ्ट, गुरु सुशांत ने दिखाया लाइव डेमो...

रांची के झारक्राफ्ट मुख्यालय में सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण की पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया गया. इसका उद्देश्य इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है.

खरसावां: रांची के उद्योग भवन स्थित झारक्राफ्ट के प्रधान कार्यालय में शनिवार को सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण की पारंपरिक कला का लाइव प्रदर्शन किया गया. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध छऊ मुखौटा शिल्पी एवं गुरु सुशांत महापात्र ने मुखौटा निर्माण की पारंपरिक तकनीकों और बारीकियों से लोगों को रूबरू कराया. कार्यक्रम में युवा शिल्पी सुमित महापात्र ने भी मुखौटा निर्माण का डेमोंस्ट्रेशन दिया.

आकार, रंग और सजावट की बतायी बारीकियां

झारक्राफ्ट में छाऊ मास्क की जानकारी देते कलाकार

गुरु सुशांत महापात्र ने छऊ मुखौटा निर्माण में प्रयुक्त पारंपरिक तकनीकों की जानकारी देते हुए बताया कि मुखौटे का आकार, भाव-भंगिमा, रंग और सजावट छऊ नृत्य के पात्र के अनुरूप तय की जाती है. उन्होंने मुखौटा तैयार करने की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रदर्शन करते हुए अपने दशकों के अनुभव भी साझा किये. उन्होंने बताया कि छऊ मुखौटा केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

नयी पीढ़ी को कला से जोड़ने पर जोर

छाऊ मास्क बनाते गुरु सुशांत महापात्र

युवा मुखौटा शिल्पी सुमित महापात्र ने मुखौटा शिल्प कला पर व्यावहारिक डेमोंस्ट्रेशन दिया. इस दौरान उपस्थित लोगों ने मुखौटा बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया को करीब से देखा और इससे जुड़ी तकनीकी जानकारी प्राप्त की. कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प तकनीकों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाना और युवा कलाकारों को इस कला से जोड़ना रहा. छऊ मुखौटा अपनी अनूठी कलात्मक अभिव्यक्ति और नृत्य पात्रों को जीवंत करने की विशिष्ट शैली के कारण देश-विदेश में पहचान बना चुका है.

संरक्षण के साथ बाजार उपलब्ध कराने पर चर्चा

झारक्राफ्ट की प्रबंध निदेशक गरिमा सिंह ने गुरु सुशांत महापात्र के साथ सरायकेला छऊ की पारंपरिक कला के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर चर्चा की. स्थानीय कलाकारों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उनकी कला को बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया. झारक्राफ्ट की ओर से कहा गया कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं. इससे कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच मिलने के साथ पारंपरिक शिल्प को नयी पहचान भी मिल सकती है.

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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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