जब देश की सेवा और फाइलों से वक्त निकालकर इस IAS ने खुद अपने हाथों से गढ़े गणपति... तस्वीरें जीत लेंगी दिल

झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी रमेश घोलप ने गणेश चतुर्थी पर अपने हाथों से मिट्टी की प्रतिमा बनाई। उनके घर में भक्तिमय माहौल और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

सरायकेला: प्रशासनिक जिम्मेदारियों और व्यस्त दिनचर्या के बीच झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी रमेश घोलप का एक अलग रूप हर साल गणेश चतुर्थी पर देखने को मिलता है. फाइलों और सरकारी कामकाज के बीच उनके हाथ जब मिट्टी को आकार देते हैं, तो उससे गणपति बप्पा की आकर्षक प्रतिमा तैयार होती है. मूल रूप से महाराष्ट्र के वर्सी के रहने वाले रमेश घोलप बाजार से गणेश प्रतिमा खरीदने के बजाय हर वर्ष स्वयं मिट्टी से बप्पा की प्रतिमा तैयार करते हैं. इसके बाद परिवार के साथ विधि-विधान से गणपति की स्थापना कर पूजा-अर्चना करते हैं.

बाजार की मूर्ति नहीं, अपने हाथों से गढ़ते हैं बप्पा

गणपति की प्रतिमा गढ़ते आईएएस रमेश घोलप

गणेश चतुर्थी पर रमेश घोलप की यह परंपरा अब उनके परिवार का हिस्सा बन चुकी है. इस वर्ष भी उन्होंने अपने हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमा तैयार की. प्रतिमा को आकार देने से लेकर उसे अंतिम रूप देने तक उनकी रचनात्मकता देखने को मिली. खास बात यह है कि इस काम में उनके दोनों बेटे भी पिता का साथ देते हैं. बच्चे मिट्टी से गणपति को आकार लेते देखते हैं और पूजा की तैयारियों में भी उत्साह से हिस्सा लेते हैं. इस तरह गणपति उत्सव उनके परिवार में आस्था के साथ कला और संस्कारों का भी उत्सव बन जाता है.

मिट्टी से जुड़कर बच्चों को दे रहे परंपरा का पाठ

गणपति की प्रतिमा

रमेश घोलप के लिए गणपति पूजा महज एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है. यह उन्हें अपनी मातृभूमि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है. नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद हर वर्ष स्वयं प्रतिमा तैयार करना उनकी सादगी और परंपराओं के प्रति लगाव को दर्शाता है. बेटों का इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होना भी खास है. मिट्टी से प्रतिमा बनाने के बहाने बच्चे भारतीय कला, संस्कृति और पारंपरिक पर्व की बारीकियों से रूबरू हो रहे हैं.

घर में गूंज रही बप्पा की आरती, अनंत चतुर्दशी पर होगी विदाई

गणपति की स्थापना के बाद रमेश घोलप के घर का माहौल भक्तिमय बना हुआ है. पूरा परिवार प्रतिदिन गणपति की पूजा-अर्चना कर रहा है और बप्पा से सुख, शांति व समृद्धि की कामना की जा रही है. इस वर्ष तैयार की गयी आकर्षक मिट्टी की प्रतिमा लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. घर में अनंत चतुर्दशी तक गणपति की आराधना होगी. इसके बाद विधि-विधान से गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी. प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी परंपरा को इस तरह जीवंत रखना रमेश घोलप की भक्ति के साथ-साथ उनकी कला और सांस्कृतिक जुड़ाव की भी खूबसूरत तस्वीर पेश करता है.

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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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