इस बार राखी कुछ खास है, ‘तरू भ्राता’ में बच्चों ने प्राकृतिक सामग्री से बनायीं राखियां

खरसावां के अशोका इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों ने प्राकृतिक सामग्री से राखियां बनाकर पेड़ों को बांधी और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया.

खरसावां : रक्षाबंधन पर अशोका इंटरनेशनल स्कूल के बच्चों ने भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़कर प्रकृति के साथ भी रक्षा का रिश्ता जोड़ा. विद्यालय में आयोजित ‘तरू भ्राता’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पेड़ों और पौधों को राखी बांधी और उनके संरक्षण का संकल्प लिया. बच्चों की इस अनूठी पहल ने रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ दिया.

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को अपने घर और आसपास कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया. मौके पर डोली गोप, सरिता तिरिया, दीप्ति बानरा, उमेश महतो, नेहा सिंह, कल्पना कुमारी, तनुश्री विश्वकर्मा, प्रिय रंजन, अबरार कुरैशी, कृष्ण चंद्र महतो, शिक्षक-शिक्षिकाएं व विद्यार्थी मौजूद थे. संचालन विद्यालय की गतिविधि प्रभारी तनुश्री विश्वकर्मा ने किया.

कौन थे मौजूद

इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक सत्यनारायण प्रधान ने बच्चों के प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है. यह उन सभी तत्वों की रक्षा का संदेश देता है, जो जीवन को संवारते हैं. पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन और छाया देते हैं, इसलिए उनकी रक्षा करना भी हमारा दायित्व है. कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को अपने घर और आसपास कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया.

कार्यक्रम में नर्सरी से नौवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया. बच्चों ने जूट, मौली धागे, सूखे पत्ते, दाल और बीज जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से खुद राखियां तैयार कीं. इसके बाद विद्यालय परिसर के बगीचे में पहुंचकर बच्चों ने पेड़ों और नन्हे पौधों की कलाइयों पर अपनी बनायी राखियां बांधीं. पौधों को राखी बांधते समय बच्चों ने उनके नियमित पोषण, सिंचाई और सुरक्षा का संकल्प लिया.


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By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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