प्रतिनिधि, मंगलहाट: राजमहल प्रखंड क्षेत्र के विश्व प्रसिद्ध कन्हैयास्थान स्थित कानाईनाट्यशाला इस्कॉन मंदिर में शनिवार को राधाष्टमी महोत्सव धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया. महोत्सव में विभिन्न जिलों से पहुंचे सैकड़ों कृष्ण भक्तों और श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.
राधाष्टमी को लेकर मंदिर परिसर को फूलों और इलेक्ट्रॉनिक लाइटों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था. रंग-बिरंगी सजावट और रोशनी से मंदिर परिसर का नजारा भक्तों को आकर्षित कर रहा था.
सुबह 4 बजे से शुरू हुआ धार्मिक कार्यक्रम
महोत्सव के दौरान सुबह करीब 4 बजे से मंगल आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई. इसके बाद दर्शन आरती, कथा, भजन-कीर्तन और प्रवचन का आयोजन किया गया. दिनभर मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा.
धार्मिक कार्यक्रमों के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर की परिक्रमा की. सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और प्रवचन का दौर चलता रहा.
गंगाजल और पंचामृत से हुआ राधा-रानी का अभिषेक
राधाष्टमी महोत्सव के अवसर पर दोपहर में राधा-रानी के श्रीविग्रह का विशेष अभिषेक किया गया. गंगाजल, दूध, दही, शहद, पंचामृत, पंच नवरत्न और केसर सहित विभिन्न पूजन सामग्री से अभिषेक किया गया.
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और राधा-रानी के अवतरण दिवस के धार्मिक आयोजन में शामिल हुए.
दुल्हन की तरह सजीं राधा-रानी
महोत्सव के अवसर पर राधा-रानी के विग्रह को दुल्हन की तरह सजाया गया था. मंदिर परिसर में सतरंगी झालरों और फूलों से की गयी सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही.
राधा-रानी के अवतरण दिवस को लेकर मंदिर परिसर में पूरे दिन उत्सव का माहौल बना रहा.
कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद मनाया जाता है राधाष्टमी
इस्कॉन मंदिर के प्रबंधक कृष्ण कृपा सिंधु ने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधाष्टमी मनायी जाती है. उन्होंने कहा कि इस दिन को राधा-रानी का अवतरण दिवस कहा जाता है.
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान का जन्म और कर्म दिव्य माने जाते हैं. इसी कारण राधा-रानी के लिए जन्मोत्सव के बजाय अवतरण दिवस शब्द का प्रयोग किया जाता है.
उन्होंने राधा-रानी को भगवान श्रीकृष्ण की अंतरंग शक्ति बताते हुए धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के बारे में श्रद्धालुओं को जानकारी दी.
विभिन्न जिलों से पहुंचे श्रद्धालु
राधाष्टमी महोत्सव में साहिबगंज सहित आसपास के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कृष्ण भक्त और श्रद्धालु पहुंचे. दिनभर मंदिर में पूजा-अर्चना, दर्शन, भजन-कीर्तन और प्रवचन का सिलसिला चलता रहा.
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने राधा-रानी के अवतरण दिवस का धार्मिक उल्लास के साथ आनंद लिया.
