आरपीएफ बनी बेजुबानों की ढाल, दो वर्षों में हजारों वन्य जीवों को बचाया

पूर्व रेलवे का ऑपरेशन वाइलेप वन्यजीव तस्करी पर कड़ा चोट

साहिबगंज

पटरियों पर दौड़ती एक ट्रेन देखने पर बाहर से सामान्य लगता है, लेकिन अंदर कहीं एक बैग में बंद होती है एक खामोश कहानी. उस बैग में कैद होते हैं बेजुबान जीव एक तोता, जिसे आसमान चाहिए था, या एक कछुआ, जिसे पानी का सुकून चाहिए था. ये वो मासूम यात्री हैं, जिन्हें अवैध तस्करी के जरिए ऐसी यात्रा पर भेज दिया जाता है, जहां उनकी आवाज़ कोई नहीं सुनता. यहीं पर आरपीएफ की भूमिका सिर्फ रेल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि यह एक मानवीय मिशन का रूप ले लेती है. पहले आरपीएफ का मुख्य काम यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की रक्षा और अपराधों पर नियंत्रण था. लेकिन समय के साथ इस बल ने अपनी जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ाया. आरपीएफ ने महिलाओं और बच्चों को बचाकर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ा. इसी अनुभव और सतर्कता को आगे बढ़ाते हुए वन्यजीव तस्करी के खिलाफ भी मजबूत मोर्चा खोला है. पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमिय नंदन सिन्हा के रणनीतिक निर्देशन में “ऑपरेशन वाइलेप” जैसे अभियान चलाए गये. परिणामस्वरूप, कई मामलों में तोते, कछुए, सांप और अन्य दुर्लभ जीवों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया. ये सिर्फ कानून लागू करने की कार्रवाई नहीं है—यह उन बेजुबान जिंदगियों को दूसरा मौका देने का प्रयास है, जो बोल नहीं सकते, लेकिन दर्द जरूर महसूस करते हैं.

पिछले दो सालों में 34 मामले आये, हजारों वन्य जीव बचाये गये

पिछले दो वर्षों में आरपीएफ की सतर्कता ने कई सफल अभियानों को जन्म दिया. वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 14 मामले पकड़े गए और 3 गिरफ्तारियां हुईं. इस दौरान 188 कछुए, 130 बुलबुल, 6 बाज के बच्चे, 5 इगुआना और 4 फाल्कन को बचाया गया. अगले वर्ष यानी 2025-2026 में यह संख्या और बढ़ी. 20 मामलों का पता चला और 26 तस्करों को गिरफ्तार किया गया. बचाव के आंकड़े प्रभावशाली रहे. 1,646 कछुए, 600 तोते, 48 कबूतर, 20 पहाड़ी तोते, 6 खरगोश, 6 राजहंस, मोर के पंखों के 40 बंडल और 3 सांप सुरक्षित किए गए.

पुनर्वास के लिए तुरंत वन विभाग को सौंपे गये वन्य जीव

हर जीव को तुरंत वन विभाग को सौंपा गया ताकि उन्हें पुनर्वासित कर जंगल में वापस भेजा जा सके. यह प्रयास दिखाता है कि वन्यजीवों की रक्षा केवल पुलिस का काम नहीं बल्कि हर इंसान का नैतिक कर्तव्य है. प्रकृति एक संतुलित घड़ी की तरह है. हर जीव चाहे छोटा पक्षी हो या दुर्लभ सांप, हमारी दुनिया को चलाने वाला एक अहम गियर है.

ट्रेनों की एस्कॉर्टिंग से लेकर हाइटेक निगरानी का इस्तेमाल

आरपीएफ ने तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ट्रेनों की एस्कॉर्टिंग से लेकर स्टेशनों पर हाई-टेक निगरानी तक हर उपकरण का इस्तेमाल किया. रेलवे अधिनियम के तहत सख्ती से कार्रवाई की गई. वन अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय ने यह सुनिश्चित किया कि अपराधियों के लिए बचने का कोई रास्ता न हो.

रेलवे ने यात्रियों से भी नजर रखने की अपील की

रेलवे के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि, हमारी पटरियां केवल शहरों को जोड़ने का काम नहीं करतीं, बल्कि जीवन की रक्षा भी करती हैं. उन्होंने यात्रियों से रेलवे की आंख और कान बनने का आग्रह किया. एक सूचना उस जान को बचा सकती है जो अपने लिए बोल नहीं सकती. इस सामूहिक प्रयास ने पूर्व रेलवे को पर्यावरण का निष्ठावान संरक्षक बना दिया है.

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Published by: Abdhesh singh

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