साहिबगंज के लिए फीका रहा रेल बजट

उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा बजट, निराशा लगी हाथ साहिबगंज : साहिबगंज की जनता के सामने एक बार फिर रेलवे बजट 2014-15 कुछ खास नहीं रहा. संसद में पेश होने वाले बजट से यहां के लोगों को काफी उम्मीदें थी मगर उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया. गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल […]

उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा बजट, निराशा लगी हाथ

साहिबगंज : साहिबगंज की जनता के सामने एक बार फिर रेलवे बजट 2014-15 कुछ खास नहीं रहा. संसद में पेश होने वाले बजट से यहां के लोगों को काफी उम्मीदें थी मगर उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया. गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल निर्माण की मांग को पूरा होने का सपना आखिरकार सपना ही रह गया.

पुल निर्माण की बात तो दूर रेल बजट ने साहिबगंज से रांची एवं दिल्ली की दूरी भी कम नहीं की. इस बजट से यहां के लोग ठगा सा महसूस कर रहे हैं. बजट पेश होने के बाद लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की है. भाजपा व्यवसायी वर्ग के राजू पोद्दार, भाजयुमो के मीडिया प्रभारी आनंद मोदी, विधायक अरुण मंडल, सांसद देवीधन बेसरा, वही झामुमो के जिला सचिव पंकज मिश्र, पूर्व विधायक ताला मरांडी, झाविमो नेता रामानंद साह, अभाविप के राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य धमेंद्र कुमार ने इसे कांग्रेस का चुनावी बजट करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा की रेल मंत्री ने बजट में घोषणाएं तो कर दी लेकिन इसे धरातल पर लाने के लिए वे पैसा कहां से लायेगी.

इधर झाविमो नेता सैयद अरशद नसर ने रेल बजट में साहिबगंज के साथ किये गये घोर उपेक्षा के लिए राजमहल लोकसभा सांसद व विधायक के साथ-साथ कांग्रेसी नेताओं को इसके लिए जिम्मेवार ठहराया है. झाविमो नेता ने तो साहिबगंज के गौरवशाली रेल इतिहास को दोबारा बहाल कराने के लिए संघर्ष व आंदोलन तक का एलान कर दिया है.

विधायक अरुण मंडल ने इसे महज एक छलावा बताया. वे साहिबगंज की उपेक्षा से काफी नाराज दिखे. उन्होंने कहा की साहिबगंज में रेलवे की सैकड़ो एकड़ जमीन खाली पड़ी है. परंतु यहां रेल मंत्री ने किसी भी कारखाने की स्थापना की घोषणा नहीं की. सांसद देवीधन बेसरा ने कहा कि बजट में छात्रों के लिए अलग से ट्रेन की घोषणा नहीं की गई . बिक्रमशीला को साहिबगंज से नहीं चलाया गया. पाकुड़ से नई दिल्ली तथा वनांचल में दो एसी कार नहीं लगाने से दिक्कत होगी. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अनंत ओझा ने इसे महानगरों का बजट करार दिया.

उन्होंने कहा की कोलकाता व मुंबई में नई ट्रेने बढ़ाई गयी है. जबकि विकासशील शहरों की उपेक्षा की गई है. लोकल ट्रेनों में भेड़ बकरी की तरह सफर करने वाला आम आदमी मंहगाई से परेशान है. झारखंड को एक मात्र ट्रेन दी गयी है. झारखंड में कई जगहों पर लोगों को रेल का दर्शन तक प्राप्त नहीं है. उन्होंने साहिबगंज की उपेक्षा पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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