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प्रवचन : यात्रा से मन विकसित होता है, पर विश्राम के लिए भी समय रखेंहम जीवन को जैसा है, वैसा ही ग्रहण कर तथा जो कुछ दिया जाता है, उसे विनम्रतापूर्वक तथा कृतज्ञतापूर्वक स्वीकार करना सीखते हैं. हम धैर्य धारण करना सीखते हैं. हम यह भी सीखते हैं कि सतत् प्रयास करते रहना उतना ही […]

प्रवचन : यात्रा से मन विकसित होता है, पर विश्राम के लिए भी समय रखेंहम जीवन को जैसा है, वैसा ही ग्रहण कर तथा जो कुछ दिया जाता है, उसे विनम्रतापूर्वक तथा कृतज्ञतापूर्वक स्वीकार करना सीखते हैं. हम धैर्य धारण करना सीखते हैं. हम यह भी सीखते हैं कि सतत् प्रयास करते रहना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना लक्ष्य पर पहुंचना. यात्रा से मन विकसित होता है. हम नये-नये लोगों, संस्कृतियों, भोजन, रीति-रिवाजों तथा स्थानों के संपर्क में आते हैं. नये-नये प्रभावों को ग्रहण करने से मन में आश्चर्य होता है. हम स्वयं को एक प्रकार से आवेशित अनुभव करते हैं तथा ध्यान की अवस्था में चले जाते हैं. परंतु हमें इस बात का भी ख्याल रखना चाहिये कि यात्राएं इतनी अधिक न करें कि थक जायें. विश्राम के लिए पर्याप्त समय भी रखें. कुछ स्थान विशेष प्रभावशाली होते हैं. वे तीर्थ स्थान होते हैं, उच्च आत्माओं के निवास तथा पृथ्वी पर दो शक्तियों के कटन-बिंदु होते हैं. कहा जाता है कि ब्रिटेन में ऐसी शक्ति-पथों के अनेक कटन-बिंदु हैं जिन्हें लेज कहते हैं.

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