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प्रवचन : गतिशील ध्यान से विकसित होती है आत्म-निर्भरता तथा आंतरिक शक्तिगतिशील ध्यान की उपर्युक्त कुछ तकनीकें दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय हो रही है. ये सशक्त तकनीकें हमें अपने व्यक्तित्व के भीतर झांकने, शरीर तथा मन को पुनर्व्यवस्थित करने में सहायक होती है. इनसे हम अपने अचेतन मन में छिपी अनेक स्मृतियों से मुक्त होते हैं. ये […]

प्रवचन : गतिशील ध्यान से विकसित होती है आत्म-निर्भरता तथा आंतरिक शक्तिगतिशील ध्यान की उपर्युक्त कुछ तकनीकें दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय हो रही है. ये सशक्त तकनीकें हमें अपने व्यक्तित्व के भीतर झांकने, शरीर तथा मन को पुनर्व्यवस्थित करने में सहायक होती है. इनसे हम अपने अचेतन मन में छिपी अनेक स्मृतियों से मुक्त होते हैं. ये तकनीकें केवल तनावों तथा दबावों के प्रभावों को दूर कर पाती है उनके कारण को नहीं. इस तरह ये तकनीकें पारंपरिक ध्यान के लिए विशेष रूप से मनोकायिक व्याधियों तथा शिरा-रोगों के उपचार के लिए उपयोगी है. बैठकर किये जाने वाले ध्यान की तकनीकों का भी ऐसा ही किंतु धीमा प्रभाव पड़ता है. उनसे व्यक्ति बिना किसी बाहरी सहायता पर निर्भर हुए स्वयं को बदलकर नई परिस्थितियों में ढाल सकता है. उसमें आत्म-निर्भरता तथा आंतरिक शक्ति विकसित होती है. यह उस बिंदु से चेतना के विकास की यात्रा प्रारंभ करता है जहां गतिशील ध्यान समाप्त होता है.

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