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प्रवचन ::यौगिक परंपरा की ही शाखा है भावातीत ध्यान भावातीत ध्यान का विद्यार्थी दो व्याख्यान सुनता है, उसके पश्चात एक फॉर्म भरता है तथा इंटरव्यू देता है. भावातीत ध्यान में दीक्षित होने के लिए व्यक्ति को निर्धारित शुल्क देना होता है.भावातीत ध्यान यौगिक परंपरा की ही एक शाखा है, परंतु वह अपनी प्राचीन धरोहर से […]

प्रवचन ::यौगिक परंपरा की ही शाखा है भावातीत ध्यान भावातीत ध्यान का विद्यार्थी दो व्याख्यान सुनता है, उसके पश्चात एक फॉर्म भरता है तथा इंटरव्यू देता है. भावातीत ध्यान में दीक्षित होने के लिए व्यक्ति को निर्धारित शुल्क देना होता है.भावातीत ध्यान यौगिक परंपरा की ही एक शाखा है, परंतु वह अपनी प्राचीन धरोहर से प्राप्त धार्मिक अनुष्ठानों को मानता है. पूर्व में जब शिष्य गुरु के दर्शन अथवा दीक्षा के लिये जाता है तो वह फल, फूल, वस्त्र तथा दक्षिणा भेंट-स्वरूप देता है. भावातीत ध्यान में भी साधक को थोड़ी मात्रा में फल-फूल तथा सफेद वस्त्र देना होता है. इसके पश्चात शिक्षक साधक को भावातीत ध्यान की कूंजी के रूप में व्यक्तिगत मंत्र प्रदान करता है और फिर व्यक्तिगत रूप से उसे ध्यान की तकनीक का प्रशिक्षण देता है. इसके पश्चात वह शिष्य से यह अपेक्षा करता है कि वह लगातार तीन दिनों तक संध्याकालीन बैठक में उपस्थित हाेकर अपनी प्रगति के बारे में शिक्षक को बतायेगा. उससे मार्गदर्शन लेगा तथा अपना अभ्यास बिल्कुल सही ढंग से जारी रखेगा. इसके बाद उसे समय-समय पर ध्यान-केंद्र में जाकर अपनी प्रगति की सूचना देना पड़ता है.

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