ओके ::: नमामि गंगे पर आयोजित कार्यशाला का दूसरा दिन

नगर प्रतिनिधि, साहिबगंजनमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन भी फीड बैंक संस्था के एके सिन्हा ने लोगों को सफाई के लिए प्रेरित किया. मौके पर उपस्थित 33 पंचायत के मुखिया, जल सहिया व उत्प्रेरकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे […]

नगर प्रतिनिधि, साहिबगंजनमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन भी फीड बैंक संस्था के एके सिन्हा ने लोगों को सफाई के लिए प्रेरित किया. मौके पर उपस्थित 33 पंचायत के मुखिया, जल सहिया व उत्प्रेरकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक खुले में शौच करने से होने वाले नुकसान, जब तक शौचालय की व्यवस्था नहीं हो जाता, तब तक यदि खुले में शौच करने जाने के क्रम में अपने साथ मिट्टी कोड़ने के लिये खुरपी लेकर जाय और गड्ढा खोद कर उसमें मल त्याग कर उसे मिट्टी से ढक दें. ताकि वातावरण प्रदूषित ना हो. वहीं दोपहर एक बजे से 12 सदस्यों वाले 12 टीम 33 पंचायत के गांव में जाकर ग्रामीणों के बीच बैठक कर गांव को स्वच्छ रखने के लिये जागरूक किया. मौके पर फीड बैंक संस्था के एके सिन्हा, अदिथि प्रोजेक्ट इंचार्ज शशिभूषण, डायरेक्टर सुबोध, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के जिला समन्वयक अफजल काजमी, राजेश सिंह, सहित 33 पंचायत के मुखिया, जल सहिया व उत्प्रेरक उपस्थित थे.——————फोटों नं 11 एसबीजी 7 हैं.कैप्सन: बुधवार को कार्यशाला मे टीम के सदस्यो को प्रशिक्षण देते एके सिन्हा.गांव में बैठक कर निगरानी समिति का किया गठन.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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