ओके ::::: 15 सूत्री मांगों के समर्थन में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने निकाला जुलूस

फोटों नं 11 एसबीजी 4 व 5 हैं.कैप्सन: बुधवार को रैली का नेतृतव करते कर्मचारीनगर प्रतिनिधि, साहिबगंज झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी संघ की जिला सचिव चंचला कुमारी के नेतृत्व में दर्जनों कर्मचारियों ने अपनी 15 सूत्री मांगों के समर्थन में बुधवार की दोपहर 12 बजे पुलिस लाइन के शिव मंदिर परिसर से जुलूस निकाला. जुलूस […]

फोटों नं 11 एसबीजी 4 व 5 हैं.कैप्सन: बुधवार को रैली का नेतृतव करते कर्मचारीनगर प्रतिनिधि, साहिबगंज झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी संघ की जिला सचिव चंचला कुमारी के नेतृत्व में दर्जनों कर्मचारियों ने अपनी 15 सूत्री मांगों के समर्थन में बुधवार की दोपहर 12 बजे पुलिस लाइन के शिव मंदिर परिसर से जुलूस निकाला. जुलूस पुलिस लाइन शिव मंदिर से होते हुए जिला समाहरणालय पहुंचा. इस दौरान कर्मचारियों ने जमकर सरकार विरोधी नारे लगाये. महासंघ के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम 15 सूत्री मांग पत्र डीसी उमेश प्रसाद सिंह को सौंपा. इस बाबत जिला सचिव चंचला कुमारी ने बतायी कि विगत हड़ताल में संपन्न समझौता के बाद भी राज्य कर्मियों को मात्र वेतन का लाभ मिला शेष बिंदु पांच वर्षों से अकार्यान्वित रह गये हैं. जिसके कारण राज्य कर्मियों के बीच रोष व्याप्त है. उक्त अवसर पर चमन चौधरी, शमशाद आलम, रेखा देवी, कलावती देवी, हरिविलास सिंह, कमल सिन्हा, मनोज तांती, विनोद , निर्मल तांती, सरोजनी देवी, परशुराम सहित दर्जनों कर्मी उपस्थित थे. क्या है मांगें – केंद्रीय कर्मियों की भांति राज्य के सभी कर्मियों को परिवहन भत्ता, शिक्षण, ट्राइबल एरिया, पहाड़ी, साइकिल, मोटरसाइकिलभत्ता मिले- वित्त विभाग झारखंड पर स्थगन आदेश को संशोधित कर लागू करे- सचिवालय एवं क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यावधि एक समान करे- एलडी, यूडी एवं लेखा लिपिक को समायोजित कर लिपिक मूल कोटि वेतनमान 5200-20200 ग्रेड पे-2800 रुपये निर्धारित करते हुए प्रथम, द्वितीय व तृतीय एमएसीपी का लाभ 4200,4600,4800 रुपये करे- महंगाई भत्ता की 50 प्रतिशत राशि को मूल वेतन से जोड़े आदि

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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