ओके::151 महिलाओं ने निकाली भव्य कलश यात्रा

–हर-हर महादेव के नारों से गुंजायमान हुआ साहिबगंज शहर–सात दिवसीय रुद्र चंडी महायज्ञ सह भागवत कथा को लेकर निकाली शोभा यात्रानगर प्रतिनिधि, साहिबगंज झरना कॉलोनी इमली टोला यज्ञ कमेटी द्वारा आयोजित सात दिवसीय रुद्र चंडी महायज्ञ सह संगीतमय भागवत कथा के प्रथम दिन मंगलवार की सुबह 9:30 बजे गाजे-बाजे के साथ भव्य कलश शोभा यात्रा […]

–हर-हर महादेव के नारों से गुंजायमान हुआ साहिबगंज शहर–सात दिवसीय रुद्र चंडी महायज्ञ सह भागवत कथा को लेकर निकाली शोभा यात्रानगर प्रतिनिधि, साहिबगंज झरना कॉलोनी इमली टोला यज्ञ कमेटी द्वारा आयोजित सात दिवसीय रुद्र चंडी महायज्ञ सह संगीतमय भागवत कथा के प्रथम दिन मंगलवार की सुबह 9:30 बजे गाजे-बाजे के साथ भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली. जिसमें 151 महिलाएं शामिल हुई. वहीं पुरोहित व पुरुष भक्त अपने-अपने हाथों में पताका लेकर यात्रा में शामिल हुए. कलश यात्रा यज्ञ स्थल से निकल कर झरना कॉलोनी, रिफ्यूजी कॉलोनी, पूर्वी फाटक, चैती दुर्गा, कमल टोला, नया टोला होते हुए गंगा घाट पहुंचा. जहां गंगा पूजन के बाद 151 महिलाओं ने अपने-अपने कलश में गंगा जल भर कर घाट रोड, हबीबपुर, टमटम स्टैंड, झरना कॉलोनी होते हुए यज्ञ स्थल पर पहुंच कर कलश स्थापित किया. शोभा यात्रा में शामिल महिला व पुरुष भक्त हर-हर महादेव, भोले बाबा की जय के नारे भी लगा रहे थे. ———————————————–फोटो नं 10 एसबीजी 3,4,5,6 हैं.कैप्सन: मंगलवार को पूजन करते पुरोहितनेतृत्व करते पुरोहित कलश यात्रा में पताका लिए भक्त कलश लेकर गंगा घाट जाती महिलाएं

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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