ट्रक के चपेट मे आने से टमटम क्षतिग्रस्त, तीन घाायल

फोटो नं 10 एसबीजी 7,8,9 हैं.कैप्सन: मंगलवार को घायलघायलघायलबेहतर ईलाज के लिये महिला सहित दो रेफर, ट्रक जब्त नगर प्रतिनिधि, साहिबगंज जिरवाबाड़ी ओपी थाना क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र के समीप एनएच 80 पर मंगलवार की सुबह नौ बजे सकरीगली से साहिबगंज आ रहा ट्रक संख्या एनएल 01 ए 8646 ने टमटम को धक्का मार […]

फोटो नं 10 एसबीजी 7,8,9 हैं.कैप्सन: मंगलवार को घायलघायलघायलबेहतर ईलाज के लिये महिला सहित दो रेफर, ट्रक जब्त नगर प्रतिनिधि, साहिबगंज जिरवाबाड़ी ओपी थाना क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र के समीप एनएच 80 पर मंगलवार की सुबह नौ बजे सकरीगली से साहिबगंज आ रहा ट्रक संख्या एनएल 01 ए 8646 ने टमटम को धक्का मार दिया. जिसमें टमटम क्षतिग्रस्त हो गया. टमटम पर सवार सात लोगों में से तीन गंभीर रूप से घायल हो गये. घायलों को ईलाज के लिये जिला सदर अस्पताल में स्थानीय लोगों की मदद से भरती कराया गया. जहां प्राथमिक उपचार के बाद हाई सेंटर रेफर कर दिया गया

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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