ओके::गंगा सेवा समिति वार्ड कमेटी का हुआ गठन, अध्यक्ष बने राजीव

संवाददाता, साहिबगंजगंगा सेवा समिति की बैठक शहर के पुरानी साहिबगंज ओझा टोली स्थित बाबा गंगेश्वर धाम मंदिर प्रांगण में हुई. इसकी अध्यक्षता बरमेश्वर नाथ ओझा ने की. मौके पर गंगा सेवा समिति के संगठन विस्तार को ध्यान में रखते हुए 24 नंबर वार्ड कमेटी का गठन किया गया. शाखा कमेटी का नाम ओझा टोली बाबा […]

संवाददाता, साहिबगंजगंगा सेवा समिति की बैठक शहर के पुरानी साहिबगंज ओझा टोली स्थित बाबा गंगेश्वर धाम मंदिर प्रांगण में हुई. इसकी अध्यक्षता बरमेश्वर नाथ ओझा ने की. मौके पर गंगा सेवा समिति के संगठन विस्तार को ध्यान में रखते हुए 24 नंबर वार्ड कमेटी का गठन किया गया. शाखा कमेटी का नाम ओझा टोली बाबा गंगेश्वर नाथ धाम समिति रखा गया. जिसके अध्यक्ष राजीव कुमार ओझा, उपाध्यक्ष आलोक ओझा, सत्येंद्र ओझा, सचिव डॉ ज्योति प्रकाश ओझा, उप सचिव कुंदन ओझा, विवेकानंद ओझा का मनोनयन किया गया. वहीं इस समिति के संरक्षण के लिए 11 सदस्यीय संरक्षक समिति भी बनायी गयी है. जिसमें महेंद्र नाथ ओझा, सुदर्शन ओझा, शंभुनाथ ओझा, हरेराम ओझा, विशेश्वर पांडे, सूर्य नारायण पांडे, रामनिवास ओझा, ओम प्रकाश ओझा, प्रमोद ओझा, जीतेंद्र कुमार ओझा, आनंद ओझा, हरिहरनाथ दुबे, राजेंद्र ओझा, मयंक ओझा, अंकित ओझा सहित दो दर्जन से अधिक युवाओं ने समिति की सदस्यता ग्रहण की. मौके पर गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार पांडे, सचिव पंकज कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष डॉ रंजीत कुमार सिंह, शशि कुमार सुमन, सुबोध राउत, प्रिंस गुप्ता, धनेश्वर तिवारी सहित दर्जनों सदस्यों ने बैठक में हिस्सा लिया. समिति की अगली बैठक आगामी 22 मार्च को पुरानी साहिबगंज स्थित ठाकुरबाड़ी घाट पर करने का निर्णय लिया गया. ———————————————————————फोटों नं 9 एसबीजी 13 हैं.कैप्सन: सोमवार को बैठक करते गंगा सेवा समिति के सदस्य

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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