होलिका दहन के पारंपरिक रूप से मनी होली

फफोटो न0ं 07 एसबीजी 08,09,10,11 हैकैप्सन- होलिका दहन के पूर्व पूजा करते विधायक, डीसी, एसपी व अन्यहोलिका दहन मे गेहूं व चने की बाली पकाते लोगअगजा का परिक्रमा करती नवविवाहित महिलाऐं सुरक्षा डयूटी पर तैनात एसडीओ व डीएसपी उमडी महिलाओ की भीड संवाददाता, साहिबगंज शीतला मंदिर के समीप होली से एक दिन पूर्व गुरुवार को […]

फफोटो न0ं 07 एसबीजी 08,09,10,11 हैकैप्सन- होलिका दहन के पूर्व पूजा करते विधायक, डीसी, एसपी व अन्यहोलिका दहन मे गेहूं व चने की बाली पकाते लोगअगजा का परिक्रमा करती नवविवाहित महिलाऐं सुरक्षा डयूटी पर तैनात एसडीओ व डीएसपी उमडी महिलाओ की भीड संवाददाता, साहिबगंज शीतला मंदिर के समीप होली से एक दिन पूर्व गुरुवार को होलिका दहन किया गया. पुरोहित जगदीश शर्मा ने विधायक अनंत ओझा, डीसी उमेश प्रसाद सिंह व एसपी सुनील भास्कर, अनुमंडल पदाधिकारी जीतेंद्र देव, डीएसपी शशिभूषण, नगर इंस्पेक्टर सीएम झा, नगर थाना प्रभारी संजीवकांत मिश्रा से पूजा करायी. इसके बाद होलिका दहन किया गया. मारवाड़ी समाज के पुरुष व महिलाओं ने गोइठा के माला व नये चने का झार आग में जलाया. होलिका में पकाये गये चने के झार को अपने घर ले जाते हैं. इसके अलावा शहर के अन्य लोंगों ने भी अपने घरों से लाये पकवानों की आहूति दी. इस अवसर पर शहर के सैकड़ों महिला व पुरुष की भीड़ उमड़ पड़ी थी. इसके अन्लावा गुल्ली भट्ठा, पटनियां टोला, दहला दुर्गा स्थान, चौक बाजार, एलसीरोड, स्टेशन चौक, कृष्ण नगर, जिरवाबाड़ी, चैती दुर्गा, गोपाल पुल आदि जगहों पर होलिका दहन किया गया.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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