ओके...31 मार्च के बाद एक सप्ताह के अंदर होगी गैस डिलेवरी : एसडीओ

फोटो नं 4 एसबीजी 4 है.कैप्सन:बुधवार को बैठक करते एसडीओ व अधिवक्तासंवाददाता, साहिबगंज31 मार्च के बाद एक सप्ताह के अंदर गैस मिलेगा. यह बातें सदर एसडीओ जितेंद्र कुमार देव ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में स्वास्तिक गैस एजेंसी व जिला अधिवक्ता संघ के अधिवक्ताओं के साथ बैठक में कही. उन्होंने कहा कि आये दिन […]

फोटो नं 4 एसबीजी 4 है.कैप्सन:बुधवार को बैठक करते एसडीओ व अधिवक्तासंवाददाता, साहिबगंज31 मार्च के बाद एक सप्ताह के अंदर गैस मिलेगा. यह बातें सदर एसडीओ जितेंद्र कुमार देव ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में स्वास्तिक गैस एजेंसी व जिला अधिवक्ता संघ के अधिवक्ताओं के साथ बैठक में कही. उन्होंने कहा कि आये दिन शिकायत मिल रही है कि गैस का नंबर लगाने मंे महीना बीत जाने के बावजूद गैस नहीं मिलता हैं. जिससे आम उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं. साथ ही गोदाम से गैस उठाने पर 30 रुपये अधिक खर्च करना पड़ता हैं. इस पर गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स विष्णुदेव सिंह ने कहा कि गोदाम से या भाड़ा गाड़ी से लेने वाले लोगों को अब 30 रुपया कम देना होगा. साथ ही दो कार्ड सब्सिडी व नन सब्सिडी के लिये देवघर कार्यालय से बात करने के बाद लागू किया जायेगा. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपना कार्ड का ट्रांस्फर इंडियन सप्लायर्स में करना चाहते है तो करा सकते हैं. अगर नाम गलत है तो उसका सुधार भी किया जायेगा. इस अवसर पर एमओ एसएन गुप्ता, डिस्ट्रीब्यूटर्स विष्णु देव सिंह, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ललित स्वदेशी, सचिव विजय कर्ण, अधिवक्ता शिव कुमार वर्मा, सरदार आनंद गोपाल, गौतम सिंह, उमाकांत सिंह सहित कई अधिवक्ता उपस्थित थे.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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