ओके....नप कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान को लेकर की बैठक

-नियमित को 10 हजार व दैनिक कर्मचारी को 5 हजार रुपया अग्रिम भुगतान देने पर बनी सहमतिनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजनगर पर्षद कर्मचारियों की बकाया वेतन भुगतान के मामले को लेकर डीसी उमेश प्रसाद सिंह के निर्देश पर बुधवार को 11 बजे नगर पर्षद कार्यालय में नप अध्यक्ष राजेश गोंड, कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक […]

-नियमित को 10 हजार व दैनिक कर्मचारी को 5 हजार रुपया अग्रिम भुगतान देने पर बनी सहमतिनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजनगर पर्षद कर्मचारियों की बकाया वेतन भुगतान के मामले को लेकर डीसी उमेश प्रसाद सिंह के निर्देश पर बुधवार को 11 बजे नगर पर्षद कार्यालय में नप अध्यक्ष राजेश गोंड, कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित हुई. एसडीओ जीतेंद्र देव ने होली पर्व को ध्यान में रखते हुए नप को स्थायी कर्मचारी को दस हजार व दैनिक कर्मचारी को पांच हजार रुपया का अग्रिम भुगतान करने की बात कही. एसडीओ श्री देव ने कहा कि होली के बाद नप कार्यपालक पदाधिकारी, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, वार्ड पर्षद व कर्मचारियों के साथ बैठक कर राजस्व उगाही एवं कर वृद्धि पर निर्णय लिया जायेगा. मौके पर नप अध्यक्ष राजेश गोंड, एमओ एसएन गुप्ता, अनुपलाल हरि, शिव हरि सहित दर्जनों नप कर्मचारी उपस्थित थे. …………फोटो नं 4 एसबीजी 6 है.कैप्सन:बुधवार को बैठक करते एसडीओ व अन्य पदाधिकारी

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

कैसा लग रहा सर” कह ग्रामीणों ने डीसी को दिखायी जर्जर सड़क

साहिबगंज के लाल अमन ने किया कमाल, आईएफएस में 27 रैंक लाकर किया नाम रौशन

टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

गंगा नदी में डॉल्फिन संरक्षण को लेकर दिया प्रशिक्षण

यह भी पढ़ें >