सुकन्या समृद्धि योजना पर कार्यशाला का आयोजन, संप के वरीय डाक अधीक्षक ने कहा

नगर प्रतिनिधि, साहिबगंजसंताल परगना के वरीय डाक अधीक्षक सत्यकाल ने कहा है कि बच्चियों के हित की योजना है ‘सुकन्या स्मृद्धि’. वे बुधवार दोपहर शहर के एक होटल में डाक विभाग द्वारा आयोजित सुकन्या समृद्धि योजना पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जिले के डाकपालों को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा : राज्य सरकार […]

नगर प्रतिनिधि, साहिबगंजसंताल परगना के वरीय डाक अधीक्षक सत्यकाल ने कहा है कि बच्चियों के हित की योजना है ‘सुकन्या स्मृद्धि’. वे बुधवार दोपहर शहर के एक होटल में डाक विभाग द्वारा आयोजित सुकन्या समृद्धि योजना पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जिले के डाकपालों को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा : राज्य सरकार ने बच्चियों की पढ़ाई व विवाह के समय आने वाले दिक्कतों को ध्यान में रख कर योजना का शुभारंभ किया गया है. कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत दो दिसंबर 2003 के बाद जन्म ली गयी बच्ची का खाता खोला जा रहा है. खाते पर प्रतिवर्ष कम से कम एक हजार व अधिक से अधिक डेढ़ लाख रुपया जमा किया जा सकता है. इस योजना में आयकर की धारा 80 सी के तहत छूट की सुविधा मिलती है इसके अलावे खाताधारक की उच्च शिक्षा और उसके वैवाहिक उद्देश्य संबंधी आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये जमा राशि के 50 प्रतिशत तक की राशि निकालने की सुविधा उपलब्ध है. वहीं साहिबगंज के डाक निरीक्षक संतोष कुमार ने उपस्थित डाकपालों से कहा कि जिले को मार्च 2015 तक 25 हजार खाता खोलने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है. 10 दिनों के अंदर जिले भर के 2120 बच्चियों का खाता खोला जा चुका है. वहीं पाकुड़ के डाक निरीक्षक वीरकुंवर सिंह ने भी डाकपालों को योजना की विस्तारित जानकारी उपलब्ध करायें. मौके पर साहिबगंज के डाक निरीक्षक संतोष कुमार, पाकुड़ के वीर कुंवर सिंह सहित जिले के 87 डाक पाल उपस्थित थे.——————————————फोटो नं 15 एसबीजी 1,2 है.कैप्सन : बुधवार को मंचासीन पदाधिकारी व उपस्थित लोग.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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