ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ के मंडलीय कन्वेंशन का आयोजन

फोटो नंबर 3 एसबीजी 8,9 हैकैप्सन: मंगलवार को कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य अतिथिउपस्थित रनिंग स्टॉफ कर्मचारीगण साहिबगंज में प्रतिनिधि, साहिबगंज शहर के नॉर्थ कॉलोनी स्थित रेलवे जेनरल इंस्टीच्यूट परिसर में मंगलवार को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन के तत्वावधान में मंडलीय कन्वेंशन हुआ. जिसकी अध्यक्षता मंडलीय अध्यक्ष एन साहा ने की. कन्वेंशन में […]

फोटो नंबर 3 एसबीजी 8,9 हैकैप्सन: मंगलवार को कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य अतिथिउपस्थित रनिंग स्टॉफ कर्मचारीगण साहिबगंज में प्रतिनिधि, साहिबगंज शहर के नॉर्थ कॉलोनी स्थित रेलवे जेनरल इंस्टीच्यूट परिसर में मंगलवार को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन के तत्वावधान में मंडलीय कन्वेंशन हुआ. जिसकी अध्यक्षता मंडलीय अध्यक्ष एन साहा ने की. कन्वेंशन में मालदा मंडल के सैकड़ों कर्मचारियों ने भाग लिया. मौके पर एसोसिएशन की मांगों पर विशेष रूप से चर्चा की गयी. कन्वेंशन में बतौर मुख्य अतिथि एमएन प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि रेलवे की स्थिति यह है कि रनिंग कर्मचारियों को न तो समय पर छुट्टी दी जाती है और न ही रेस्ट दिया जाता है. चूंकि रनिंग कर्मचारियों की लगभग आधी से अधिक सीटें खाली है. इसके बावजूद रोजाना नयी ट्रेनें चलायी जा रही है. बताया कि प्रत्येक वर्ष 30 प्रतिशत ज्यादा निर्धारित लक्ष्य से गाड़ी चलाने के बावजूद एक जगह शामिल होना इस संगठन की उपलब्धि है. मौके पर महासचिव रामराज्य भगत, जोनल अध्यक्ष अजय कुमार सहित दर्जनों उपस्थित थे. मुख्य मांगेंहाई पावर कमेटी के द्वारा एसपीएडी को रोकने के लिए रेलवे के द्वारा दिये गये दिशा निर्देश को अविलंब लागू हो रनिंग कर्मचारियों को अविलंब इंसेंटिव घोषित करने ड्यूटी छह घंटे से ज्यादा न लें एनपीसी को खत्म करने व पुरानी पेंशन नीति को लागू होरेलवे में 100 फीसदी एफडीआइ बंद हो

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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