ओके ::: ट्रेन की छत पर सफर कर रहे युवक की मौत

लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक पुल से टकराने से युवक की हुई मौतफोटों नं 2 एसबीजी 15,16 हैं.कैप्सन: सोमवार को ट्रेन के डब्बे के छत पर पडा शवजांच करते आरपीएफ व स्टेशन प्रबंधक प्रतिनिधि, साहिबगंज साहिबगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी ट्रेन जमालपुर-कटवा पैसेंजर से रेल थाना पुलिस ने सोमवार को एक […]

लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक पुल से टकराने से युवक की हुई मौतफोटों नं 2 एसबीजी 15,16 हैं.कैप्सन: सोमवार को ट्रेन के डब्बे के छत पर पडा शवजांच करते आरपीएफ व स्टेशन प्रबंधक प्रतिनिधि, साहिबगंज साहिबगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी ट्रेन जमालपुर-कटवा पैसेंजर से रेल थाना पुलिस ने सोमवार को एक युवक का शव बरामद किया है. युवक की शिनाख्त अब तक नहीं हो पायी है. रेल यात्रियों के अनुसार शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंजन से सटे चौथे डिब्बे 11454 की छत पर युवक सवार हुआ था. लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक वह पुल से युवक टकरा गया. इसके बाद उस डिब्बे में बैठे लोगों को खून के छींटे पड़े. पीरपैंती रेलवे स्टेशन पर यात्रियों ने उतर कर देखा तो ट्रेन की छत पर एक युवक की लाश पड़ी है. इसके बाद साहिबगंज स्टेशन प्रबंधक केपी सिंह, आरपीएफ इंस्पेक्टर जितेंद्र सिन्हा व जीआरपी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया. इधर रेल पुलिस मामले की यूडी केस दर्ज कर छानबीन में जुट गयी है. ……..ओके ::: ट्रेन की चपेट में आने से महिला की मौतकोटालपोखर. पाकुड़-बरहरवा रेलखंड के बीच कोटालपोखर रेलवे स्टेशन के समीप सोमवार को एक 50 वर्षीय अज्ञात महिला की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हो गई. ग्रामीणों के मुताबिक उक्त महिला को भीख मांगते हुए गांव में देखा गया था. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया है.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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