पेंशनर को भी मिले हर सुविधा

संवाददाता, साहिबगंजपेंशनर को भी हर सुविधा मिलनी चाहिए. यह बातें रेलवे पेंशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष एलएन वर्मा ने कही. रविवार को इस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन कार्यालय में रेलवे पेंशनर एसोसिएशन का स्थापना दिवस मनाया गया. श्री वर्मा ने कहा कि बैंक, रेलवे, बस स्टैंड सहित अन्य कार्यालयों में पेंशनर को भारी परेशानी का सामना करना […]

संवाददाता, साहिबगंजपेंशनर को भी हर सुविधा मिलनी चाहिए. यह बातें रेलवे पेंशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष एलएन वर्मा ने कही. रविवार को इस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन कार्यालय में रेलवे पेंशनर एसोसिएशन का स्थापना दिवस मनाया गया. श्री वर्मा ने कहा कि बैंक, रेलवे, बस स्टैंड सहित अन्य कार्यालयों में पेंशनर को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं. रैंप नहीं रहने से आने जाने में काफी दिक्कत होती है. उन्होंने प्रशासन से हर संभव मदद करने की मांग की हैं. कार्यक्रम में मो सज्जाद, अनिल राय, नरसिंह साह, एलएन वर्मा, एनसी प्रमाणिक, विक्रम प्रसाद सिंह आदि थे.नये कमेटी गठितइस अवसर पर नयी कमेटी बनायी गयी. इसमें अध्यक्ष एलएन वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष ए पासवान, उपाध्यक्ष एमएल सिन्हा, एचपी सिंह, सचिव एनसी प्रमाणिक, संयुक्त सचिव डीपी राम, सहायक सचिव नरसिंह साह, एससी सन्याल, कोषाध्यक्ष एचआर सिंह, सहायक कोषाध्यक्ष बीआर केवट, कार्यक्रम सचिव बीपी सिंह, काशी नाथ प्रसाद, कार्यालय सचिव सुबोध पासवान, भोला, कार्यकारिणी सदस्य हीरालाल साह, जयनारायण, उदय कांत झा, बबन प्रसाद सिंह, बीएन पासवान, टी साह आदि है……….फोटों नं 1 एसबीजी 7,8 हैं.कैप्सन:रविवार को कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य अतिथि उपस्थित लोग

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

कैसा लग रहा सर” कह ग्रामीणों ने डीसी को दिखायी जर्जर सड़क

साहिबगंज के लाल अमन ने किया कमाल, आईएफएस में 27 रैंक लाकर किया नाम रौशन

टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

गंगा नदी में डॉल्फिन संरक्षण को लेकर दिया प्रशिक्षण

यह भी पढ़ें >