...... मिडिल क्लास को नहीं मिली राहत, आम बजट पर प्रतिक्रिया

आम बजट पर लोगो की मिश्रित प्रतिक्रियाप्रतिनिधिसाहिबगंज: आम बजट पर कोई खास राहत नहीं दिए गया है. उद्योगों पर लगने वाले टैक्स को घटाने और सभी चीजों पर सर्विस टैक्स लगाने से मिडिल क्लास के लोगों को निराश ही हाथ लगी है. इसपर शहर के कुछ लोगों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी. आम बजट में सभी […]

आम बजट पर लोगो की मिश्रित प्रतिक्रियाप्रतिनिधिसाहिबगंज: आम बजट पर कोई खास राहत नहीं दिए गया है. उद्योगों पर लगने वाले टैक्स को घटाने और सभी चीजों पर सर्विस टैक्स लगाने से मिडिल क्लास के लोगों को निराश ही हाथ लगी है. इसपर शहर के कुछ लोगों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी. आम बजट में सभी प्रोडक्ट पर सर्विस टैक्स लगाने से महंगाई और बढ़ जायेगी. इससे खासकर मिडिल क्लास के लोगों की परेशानी बढ़ेगी. लिहाजा यह बजट सिर्फ उद्योगपतियों के लिए है.रियाजुद्दीन, समाजसेवी फोटो नंबर 28 एसबीजी 16 हैआम बजट में उद्योगपतियों के टैक्स में कटौती कर यह साबित हो गया है कि सरकार सिर्फ कॉरपोरेट घराने की है. इस सरकार को आम जनता से कोई लेना देना नहीं है.उमेश सिन्हा, दुकानदारफोटो नंबर 28 एसबीजी 17 हैआम बजट में सभी वर्गों का ख्याल रखते हुए कंेद्र सरकार ने करीब महंगाई घटाने की पहल की है. अब जल्द ही अच्छे दिन आने की उम्मीद जग रही है.राजू पोद्दार, एकाउंटेंटफोटो नंबर 28 एसबीजी 18 हैआम बजट में महंगाई को लेकर कोई खास योजनाओं को नहीं लाया गया है. हालांकि टैक्स में कटौती कर लोगों को राहत दी गयी है.डॉ रंजीत सिंह, प्रोफेसरफोटो नंबर 28 एसबीजी 19 हैआम बजट में स्वास्थ्य बीमा अब 15000 से नहीं खुल कर 25000 तक करना सरकार का गलत निर्णय है. यह निर्णय आम वर्ग को खासा प्रभावित करेगा. लिहाजा यह बजट मिडिल वर्ग के लिए नहीं है. मो महताब, व्यवसायीफोटो नंबर 28 एसबीजी 20 हैआम बजट में गरीबों के लिए कोई खास योजना नहीं है. वहीं गरीबों को मिलने वाली सब्सिडी को भी कम नहीं किया गया है. सूर्या पहाडि़याफोटो नंबर 28 एसबीजी 21 है

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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