ओके... भारत स्काउट गाइड के आयुक्त को मिला सम्मान

फोटो नंबर 28 एसबीजी 12 हैकैप्सन: शनिवार को प्रमाण पत्र के साथ समन्वयक अजय सिंह. संवाददाता, साहिबगंजभारत स्काउट एवं गाइड्स के पंचमढ़ी मध्य प्रदेश स्थित राष्ट्रीय साहसिक संस्था के तत्वावधान में आयोजित 17 वीं अंतरराष्ट्रीय साहसिक कार्यक्रम 25 फरवरी को संपन्न हुआ. जिसमें पूर्व रेलवे भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मालदा मंडल साहिबगंज के प्री एएलटी […]

फोटो नंबर 28 एसबीजी 12 हैकैप्सन: शनिवार को प्रमाण पत्र के साथ समन्वयक अजय सिंह. संवाददाता, साहिबगंजभारत स्काउट एवं गाइड्स के पंचमढ़ी मध्य प्रदेश स्थित राष्ट्रीय साहसिक संस्था के तत्वावधान में आयोजित 17 वीं अंतरराष्ट्रीय साहसिक कार्यक्रम 25 फरवरी को संपन्न हुआ. जिसमें पूर्व रेलवे भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मालदा मंडल साहिबगंज के प्री एएलटी सह मुख्य आयुक्त अजय कुमार सिंह को उक्त कार्यक्रम के अधिकारियों के समूह में शामिल किया गया. कार्यक्रम में कुल 488 प्रतिभागियों ने तीरंदाजी, रायफल, पिस्टल शुटिंग, ब्लाइंड ट्रेलिंग, कमांडो क्लाइमिंग, रेपलिंग, जुमारिंग, वोटिंग, हॉर्स राइडिंग, पांडव केम ट्रेकिंग, डचेसफॉल ट्रेकिंग, राजेंद्र गिरि एवं चौरागढ़ ट्रेकिंग में हिस्सा लिया. जबकि 24 फरवरी को ग्रांड कैंप फादर का आयोजन किया गया था. जिसके मुख्य अतिथि भारत स्काउट एवं गाइड्स के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त बीआइ नगराले उपस्थित थे. इस अवसर पर स्काउटस गाइड्स के अधिकारियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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