16 सूत्री मांग को लेकर सीटू के सदस्यों ने दिया धरना

संवाददाता, साहिबगंज जिला मुख्यालय के स्टेशन चौक पर गुरुवार को कंेद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 16 सूत्री मांग को लेकर सीटू के सदस्यों ने श्याम सुंदर पोद्दार के नेतृत्व में धरना दिया. धरना के बाद एक शिष्टमंडल ने प्रभारी डीसी को राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि […]

संवाददाता, साहिबगंज जिला मुख्यालय के स्टेशन चौक पर गुरुवार को कंेद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 16 सूत्री मांग को लेकर सीटू के सदस्यों ने श्याम सुंदर पोद्दार के नेतृत्व में धरना दिया. धरना के बाद एक शिष्टमंडल ने प्रभारी डीसी को राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि केंद्र सरकार केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ठेकेदारी प्रथा व आउटसोर्सिंग का उन्मूलन कर मजदूर विरोधी कार्य कर रही है. इसको लेकर अप्रैल में संसद मार्च करने के बाद देश व्यापी हड़ताल किया जायेगा. इस अवसर पर परशुराम सिंह, जयंत पासवान, अरशद नसर, सदानंद ठाकुर, गुप्तेश्वर राय, नसीर, संजय पासवान, मनोहर दास, महावीर पासवान, रंगलाल यादव, विजय तिवारी, श्यामलाल राय, सत्यनारायण पटेल आदि थे………….फोटों नं 26 एसबीजी 21 हैं.कैप्सन: गुरूवार को स्टेशन चौक धरना देते सीटू के सदस्यगण

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

लोक अदालत न्याय व्यवस्था को बनाता है सरल व सुलभ : पीडीजे

कैसा लग रहा सर” कह ग्रामीणों ने डीसी को दिखायी जर्जर सड़क

साहिबगंज के लाल अमन ने किया कमाल, आईएफएस में 27 रैंक लाकर किया नाम रौशन

टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

यह भी पढ़ें >