रैमकी कंपनी से 1.5 करोड़ रंगदारी मांगने वाला सरगना धराया

– असम के नक्सली गिरोह का मुखिया है पकड़ाया गया ऐपिल मुर्मूप्रतिनिधि, साहिबगंजरैमकी कंपनी के मैनेजर से 1.5 करोड़ रंगदारी मांगने वाला असम का कुख्यात नक्सली ऐपिल मुर्मू को पुलिस ने बोरियो के रणचारा स्थित सीएसआर कैंप से सटे बीच सड़क से गिरफ्तार किया है. इसके पास से पुलिस ने एक देशी कट्टा व एक […]

– असम के नक्सली गिरोह का मुखिया है पकड़ाया गया ऐपिल मुर्मूप्रतिनिधि, साहिबगंजरैमकी कंपनी के मैनेजर से 1.5 करोड़ रंगदारी मांगने वाला असम का कुख्यात नक्सली ऐपिल मुर्मू को पुलिस ने बोरियो के रणचारा स्थित सीएसआर कैंप से सटे बीच सड़क से गिरफ्तार किया है. इसके पास से पुलिस ने एक देशी कट्टा व एक जिंदा कारतूस भी बरामद किया है. मंगलवार को जिरवाबाड़ी थाने में संवाददाता सम्मेलन कर एसपी ने यह जानकारी दी. एसपी ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर प्रशिक्षु डीएसपी संजीव भगत के नेतृत्व में बोरियो थाना प्रभारी रवींद्र नाथ तिवारी, एसआइ विनोद उरांव व अन्य जवानों की एक टीम ने रणचरा में छापेमारी की. छापेमारी के दौरान ऐपिल को गिरफ्तार कर लिया गया. एसपी ने बताया कि रंगदारी का मास्टरमाइंड ऐपिल इससे पूर्व में असम के व्यवसायी ओंकारमल के अपहरण कांड में शामिल था. अपहरण की वारदात की साजिश ऐपिल ने ही रची थी और मास्टरमाइंड भी यही था. फिलहाल गिरफ्तार मास्टरमाइंड से पूछताछ चल रही है. इधर, बोरियो थाना पुलिस ने मास्टरमाइंड ऐपिल को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है.———————फोटो24 एसबीजी 1 व 2

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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