ओके... दो दिवसीय जन उत्सव आज से

फोटो नंबर 24 एसबीजी 11 हैकैप्सन: स्टेडियम में बना पंडालसंवाददाता, साहिबगंजशहर के सिदो कान्हू स्टेडियम में 25 व 26 फरवरी को दो दिवसीय जन उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमंे साहिबगंज व पाकुड़ के आदिवासी बहुल क्षेत्र मंडरो, बोरियो, बरहेट, तालझारी, पतना, हिरणपुर, महेशपुर, लिट्टीपाड़ा प्रखंड से हजारों लोग भाग लेंगे. उत्सव का उदघाटन […]

फोटो नंबर 24 एसबीजी 11 हैकैप्सन: स्टेडियम में बना पंडालसंवाददाता, साहिबगंजशहर के सिदो कान्हू स्टेडियम में 25 व 26 फरवरी को दो दिवसीय जन उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमंे साहिबगंज व पाकुड़ के आदिवासी बहुल क्षेत्र मंडरो, बोरियो, बरहेट, तालझारी, पतना, हिरणपुर, महेशपुर, लिट्टीपाड़ा प्रखंड से हजारों लोग भाग लेंगे. उत्सव का उदघाटन ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, विधायक ताला मरांडी, डीसी उमेश प्रसाद सिंह, एसपी सुनील भास्कर, सीएस डॉ बी मरांडी व अन्य पदाधिकारी करेंगे. दूसरे दिन लिट्टीपाड़ा के विधायक स्टीफन मरांडी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. कार्यक्रम को सफल बनाने में एफिकोर के रफन बाखला, अनु सिंह, अनिल सिन्हा, प्रभात कुमार, विकास सिन्हा, धीरज आदि पदाधिकारी जुटे हैं. स्टेडियम में भव्य पंडाल बनाया गया है. दो गेट बनाये गये हैं. पैक्स के स्टेट मैनेजर जॉनसन टोपनो ने बताया कि जन उत्सव कार्यक्रम में पैक्स, इफिकोर व बदलाव फाउंडेशन की ओर से कई स्टॉल लगाया जायेगा. वहीं स्वास्थ्य, पोषण, मनरेगा, वनाधिकार ग्राम सभा सप्ताह सहित अन्य योजनाओं की जानकारी दी जायेगी. श्री टोपनो ने बताया कि पैक्स गरीबों को केंद्र व राज्य सरकार की ओर से चल रही योजनाओं की जानकारी देने के लिए जागरूक करता है.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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