ओके... 24 केंद्रों पर अंगरेजी की परीक्षा

फोटो न0ं 21 एसबीजी 2,6 हैकैप्सन-शनिवार को मैट्रिक की परीक्षा देते परीक्षार्थीपरीक्षा केंद्र पर उमड़ी भीड़ साहिबगंज/बोरियो/मंडरो/राजमहल/बरहरवा/बरहेट/पतना . शनिवार को मैट्रिक के अंगरेजी विषय की परीक्षा जिले के 24 केंद्रों पर हुई. जिसमें 12521 परीक्षार्थी में 12401 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दिया. जबकि 120 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे. डीइओ डॉ भेलेरियन तिर्की ने बताया कि परीक्षा कदाचारमुक्त […]

फोटो न0ं 21 एसबीजी 2,6 हैकैप्सन-शनिवार को मैट्रिक की परीक्षा देते परीक्षार्थीपरीक्षा केंद्र पर उमड़ी भीड़ साहिबगंज/बोरियो/मंडरो/राजमहल/बरहरवा/बरहेट/पतना . शनिवार को मैट्रिक के अंगरेजी विषय की परीक्षा जिले के 24 केंद्रों पर हुई. जिसमें 12521 परीक्षार्थी में 12401 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दिया. जबकि 120 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे. डीइओ डॉ भेलेरियन तिर्की ने बताया कि परीक्षा कदाचारमुक्त वातावरण में हुआ है.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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