बंदरगाह निर्माण के लिये स्थल की एनओसी रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर जमा करें : डीसी

संवाददाता, साहिबगंजबंदरगाह निर्माण के लिये स्थल की एनओसी रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर जमा करें. यह बातें डीसी उमेश प्रसाद सिंह ने शनिवार को विकास भवन के सभागार में आयोजित बैठक में उपस्थित पदाधिकारी को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि जमीन जितना चाहिए उसकी जांच कर ले. साथ ही जमीन में यदि कोई […]

संवाददाता, साहिबगंजबंदरगाह निर्माण के लिये स्थल की एनओसी रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर जमा करें. यह बातें डीसी उमेश प्रसाद सिंह ने शनिवार को विकास भवन के सभागार में आयोजित बैठक में उपस्थित पदाधिकारी को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि जमीन जितना चाहिए उसकी जांच कर ले. साथ ही जमीन में यदि कोई व्यक्ति रह रहा है तो उस जमीन पर उसे हटाने के लिये मुआवजा राशि को अविलंब देने के लिये भू-अर्जन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें. बैठक में ही वित्तीय वर्ष समाप्ति को देखते हुए यूआइडी कार्ड में काफी धीमी प्रगति होने पर सभी बीडीओ को डांट पिलाते हुए समय रहते कार्य को पूरा करने का निर्देश दिया. साथ ही कहा : यदि किसी प्रकार की कार्य में लापरवाही बरती गयी तो विभागीय कार्रवाई भी की जायेगी. बैठक में हर हाल में लंबित योजनाओं को पूर्ण करने का निर्देश दिया गया. बैठक में जिले में चल रहे इंदिरा आवास, सांसद मद की योजनाओं में और तेजी लाने तथा बिजली, सड़क, पानी के मुद्दों को भी अहम स्थान देते हुए पूर्ण करने की बात कही. 28 फरवरी तक सदर व राजमहल एसडीओ को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. मौके पर डीडीसी मुकुंद दास, एसी निरंजन कुमार, डीआरडीए निदेशक श्रीपति गिरि, डीपीओ रामनिवास सिंह, सदर एसडीओ जितेंद्र देव, राजमहल एसडीओ विधानचंद्र चौधरी सहित सभी प्रखंडों के बीडीओ, सीओ, सीडीपीओ एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.———————-फोटों नं 21 एसबीजी 19, 20 हैं.कैप्सन : शनिवार को बैठक को संबोधित करते डीसी, उपस्थित पदाधिकारीगण.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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