जैक की गलती : अंगरेजी की परीक्षा को बंगला में बदला

– दर्जनों छात्र परीक्षा देने से रहे वंचित- एडमिट कार्ड में ही बदल दिया था विषयनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजझारखंड अधिविद्य परिषद रांची द्वारा अतिरिक्त विषय में अंगरेजी के जगह पर बंगला विषय कर देने के मामले को लेकर शनिवार को जिला मुख्यालय के रेलवे उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने से दर्जनों छात्र छात्राएं वंचित […]

– दर्जनों छात्र परीक्षा देने से रहे वंचित- एडमिट कार्ड में ही बदल दिया था विषयनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजझारखंड अधिविद्य परिषद रांची द्वारा अतिरिक्त विषय में अंगरेजी के जगह पर बंगला विषय कर देने के मामले को लेकर शनिवार को जिला मुख्यालय के रेलवे उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने से दर्जनों छात्र छात्राएं वंचित रह गये. छात्र छात्राओं को परिषद की गलती के कारण परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश करने नहीं दिया गया. इस बाबत छात्र अंकित भगत, छोटू कुमार, काजल कुमारी, पूनम कुमारी ने बताया कि अतिरिक्त विषय में हिंदी, अंगरेजी व संस्कृत हमलोगों ने भरा था. लेकिन एडमिड कार्ड में अंगरेजी की जगह पर बंगला कर दिया गया, जिसके कारण आज हमलोग परीक्षा नहीं दे सके.क्या कहते हैं डीईओसाहिबगंज डीईओ भेलेरियन तिर्की ने कहा कि छात्र छात्राओं की शिकायत प्राप्त हुआ है. परिषद को लिखा जायेगा. लेकिन जो छात्र-छात्राएं परीक्षा से वंचित रह गये हैं, वे 24 फरवरी को बंगला विषय की परीक्षा में शामिल हो जायें, क्योंकि दो विषय में पास करना अनिवार्य है.———————————फोटों नंबर 21 एसबीजी 7,8,9 हैं.कैप्सन: शनिवार को परीक्षा केंद्र पर विरोध जताते छात्र छात्राएंएडमिट कार्डएडमिट कार्ड————————–रेलवे उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर छात्र छात्राओं ने जताया विरोधअतिरिक्त विषय अंगरेजी के जगह पर बंगला विषय कर देने से परीक्षा देने से वंचित हो गये छात्र छात्रा.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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