ओके :::::: नुक्कड़ नाटक के माध्यम से देंगे गंगा को स्वच्छ रखने का संदेश

नाटक में भाग लेने वाले कलाकारों का हुआ ऑडिशन 33 पंचायत के लोगों को दिया जायेगा गंगा को स्वच्छ रखने का संदेशफोटो नंबर 20 एसबीजी 7,8 हैं.कैप्सन:- शुक्रवार को नुक्कड़ नाटक देखते एसी, डीपीओ व डीटीओ नगर प्रतिनिधि, साहिबगंज नमामि गंगे कार्यक्रम तहत गंगा को स्वच्छ रखने के लिए 33 पंचायत के लोगों को नुक्कड़ […]

नाटक में भाग लेने वाले कलाकारों का हुआ ऑडिशन 33 पंचायत के लोगों को दिया जायेगा गंगा को स्वच्छ रखने का संदेशफोटो नंबर 20 एसबीजी 7,8 हैं.कैप्सन:- शुक्रवार को नुक्कड़ नाटक देखते एसी, डीपीओ व डीटीओ नगर प्रतिनिधि, साहिबगंज नमामि गंगे कार्यक्रम तहत गंगा को स्वच्छ रखने के लिए 33 पंचायत के लोगों को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूक किया जायेगा. जिसके तहत शुक्रवार को जिला समाहरणालय परिसर में डीसी उमेश प्रसाद सिंह की उपस्थिति में पदाधिकारियों ने समर्पण संस्थान साहिबगंज व लोकहित संस्कार केंद्र बरहेट के कलाकारों का ऑडिशन लिया गया. समर्पण व लोकहित संस्कार केंद्र कला जत्था के महिला व पुरुष कलाकारों ने गाजे-बाजे, गीत-संगीत के साथ गंगा में कचरा ना डालने, कपड़ा न धोने संबंधी जागरूकता नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया. मौके पर एसी निरंजन कुमार, जिला योजना पदाधिकारी रामनिवास सिंह, डीटीओ प्रदीप तिग्गा, समर्पण संस्थान के संयोजक नित्यानंद, धीरेंद्र मंडल, भूदेव मंडल, परनू महतो, काशीनाथ महतो, रेखा टुडू, विद्या देवी, ललिता देवी, शिव कुमारी, लोकहित के सचिव संजय गुप्ता, शमीम अंसारी, होरिल ठाकुर, रेखा देवी, अनिता देवी, निर्मला मुर्मू सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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