ओके::फ्लैग-प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में डीसी ने कहा

-ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वितरण में ना बरतें लापरवाही -पीएमइजीपी जागरूकता शिविर में 53 अभ्यर्थियों का हुआ साक्षात्कारनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजशहरी के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी ध्यान दें बैंकर्स. यह बातें डीसी उमेश प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को विकास भवन के सभाकक्ष में आयोजित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत जागरूकता शिविर में कही. उन्होंने […]

-ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वितरण में ना बरतें लापरवाही -पीएमइजीपी जागरूकता शिविर में 53 अभ्यर्थियों का हुआ साक्षात्कारनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजशहरी के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी ध्यान दें बैंकर्स. यह बातें डीसी उमेश प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को विकास भवन के सभाकक्ष में आयोजित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत जागरूकता शिविर में कही. उन्होंने कहा कि अक्सर देखने को मिलता है कि बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण मुहैया कराने में लापरवाही बरतती है. लेकिन इस सोच को बदलना होगा. इसके पूर्व डीसी उमेश प्रसाद सिंह, उद्योग विभाग के महाप्रबंधक बी दास, लीड बैंक मैनेजर सुधांशु वर्मा, केवीआइसी रांची के सदस्य मिस्टर अली ने संयुक्त रूप से जागरूकता शिविर का उदघाटन किया. वहीं केवीआइसी सदस्य मिस्टर अली ने कहा कि यूनाइटेड बैंक द्वारा एक से दो लाख का ऋण स्वीकृत नहीं किया जाना दु:ख की बात है. जिले के सभी बैंक ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने के प्रति जागरूक नहीं हैं. सभी बैंक यह सुनिश्चित कर लें कि ग्रामीण क्षेत्रों के भी ऋण को स्वीकृत करना है. वहीं डीसी उमेश प्रसाद सिंह, उद्योग विभाग के जीएम बी दास, लीड बैंक के मैनेजर सुधांशु वर्मा, केभीआइसी रांची के सदस्य मिस्टर अली द्वारा जागरूकता शिविर में आये केवीआइबी के 29, डीआइसी के 11, केभीआइसी के 13, अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया. उक्त मौके पर जिले के सभी बैंकों के शाखा प्रबंधक व दर्जनों अभ्यर्थी उपस्थित थे. ———————————————-फोटो नंबर 20 एसबीजी 5,6 है. कैप्सन:- शुक्रवार को कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य अतिथिउपस्थित लोग

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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