शांति के लिये तनाव मुक्त होना जरूरी : डीसी

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी इश्वरीय विश्वविद्यालय में मनाया गया शिवरात्रि महोत्सवनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजमनुष्य को उत्थान की ओर अग्रसर होने के लिये तनाव मुक्त होना अति आवश्यक है. यह बातें डीसी उमेश प्रसाद सिंह ने गुरुवार को प्रजापिता ब्रह्मकुमारी इश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित महाशिवरात्रि महोत्सव में कही. उन्होंने कहा कि अच्छी बात है कि संस्थान जाति, धर्म, ऊंच-नीच […]

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी इश्वरीय विश्वविद्यालय में मनाया गया शिवरात्रि महोत्सवनगर प्रतिनिधि, साहिबगंजमनुष्य को उत्थान की ओर अग्रसर होने के लिये तनाव मुक्त होना अति आवश्यक है. यह बातें डीसी उमेश प्रसाद सिंह ने गुरुवार को प्रजापिता ब्रह्मकुमारी इश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित महाशिवरात्रि महोत्सव में कही. उन्होंने कहा कि अच्छी बात है कि संस्थान जाति, धर्म, ऊंच-नीच से ऊपर उठ कर लोगों को शांति प्रदान करने के लिये ज्ञान दे रही है. इसके पूर्व डीसी श्री सिंह, डीआरडीए निदेशक श्रीपति गिरि, एसडीओ जितेंद्र कुमार देव, धनबाद से आयी राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी अनु दीदी का स्वागत रूपा बहन ने बूके देकर किया. राजयोगिनी अनु दीदी ने कहा कि मनुष्य आत्माएं अनेक हैं. धर्म आत्माएं अनेक हैं. महान आत्माएं अनेक हैंं, देव आत्माएं अनेक हैं, लेकिन परमात्मा एक है. प्यार ही करना है तो परमात्मा से करो. इस अवसर पर बीके बिंदु दीदी, बीके प्रतिभा दीदी, संतोष, जयप्रकाश, महेंद्र पोद्दार, श्रीनिवास, नीलम दीदी, केशव, रंजीत, संदीप दीवान, नवीन भगत, नित्यानंद, आनंद मोदी, संजय सिन्हा आदि थे……………….फोटो नंबर 20 एसबीजी 9,10 हैकैप्सन:- शुक्रवार को कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्य अतिथिउपस्थित लोग

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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