रैमकी कंपनी से रंगदारी मांगे जाने मामले में पुलिसिया तफ्तीश शुरू

प्रतिनिधि, साहिबगंजसाहिबगंज-बरहेट एक्सप्रेस रोड निर्माण कंपनी रैमकी के प्रोजेक्ट मैनेजर रामामूर्ति से रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस की तफ्तीश सुस्त चाल से चल रही है. अबतक पुलिस रंगदारी मांगने वाले की पता लगाने में नाकाम है. हालांकि बोरियो थाना पुलिस ने मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली है. रंगदारी मामले को पुलिस नक्सली संगठनों […]

प्रतिनिधि, साहिबगंजसाहिबगंज-बरहेट एक्सप्रेस रोड निर्माण कंपनी रैमकी के प्रोजेक्ट मैनेजर रामामूर्ति से रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस की तफ्तीश सुस्त चाल से चल रही है. अबतक पुलिस रंगदारी मांगने वाले की पता लगाने में नाकाम है. हालांकि बोरियो थाना पुलिस ने मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली है. रंगदारी मामले को पुलिस नक्सली संगठनों से भी जोड़ कर देख रही है. पुलिस बीते दिनों तीन लोगों को पाकुड़ से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था. लेकिन पुलिस को इनलोगों से पूछताछ में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगी है. लिहाजा पुलिस अबतक अंधेरे में तीर चला रही है. पुलिस सूत्रों की मानें तो बीते मंगलवार की रात लिट्टीपाड़ा प्रखंड के जोबोडीह से रामाशीला टुडू, छुतार टुडू व जोन मुर्मू को हिरासत में लेकर जिरवाबाड़ी ओपी पुलिस में काफी देर तक पूछताछ की गयी.कुछ भी बताने से कतरा रही है पुलिसजिला पुलिस रैमकी कंपनी के मैनेजर से रंगदारी मांगने के मामले में कुछ भी बताने से कतरा रही है. डीएसपी शशिभूषण ने इस संबंध में पूछे जाने पर अस्वस्थ होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया. जबकि बोरियो थाना प्रभारी मैनेजर के सुरक्षा का हवाला देकर कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं.क्या कहते हैं प्रभारी एसपीप्रभारी एसपी शशिभूषण ने कहा कि रंगदारी मांगने के मामले की जांच पुलिस कर रही है. जल्द ही रंगदारी मांगने वाले अपराधी पुलिस की पकड़ में होंगे.———————————-फोटो नंबर 18 एसबीजी 9 हैकैप्सन : सुनसान पड़ा रैमकी का प्लांट.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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