ओके ::: तालाब का अस्तित्व बचाने को लेकर ग्रामीणों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन

संवाददाता, साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड के श्रीकुंड स्थित तालाब का अस्तित्व को बचाने के लिए ग्रामीण शमीम अख्तर, गुड्डू भगत, तस्लीम खान व अनवर आलम ने बुधवार को डीसी को ज्ञापन सौंपा. जिसमें ग्रामीणों ने बरहरवा अंचल अंतर्गत मौजा श्रीकुंड थाना नं-8, जनं-206, दाग नं-153, रकवा 2 की जमीन जो सर्वे खतियान में सरकारी […]

संवाददाता, साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड के श्रीकुंड स्थित तालाब का अस्तित्व को बचाने के लिए ग्रामीण शमीम अख्तर, गुड्डू भगत, तस्लीम खान व अनवर आलम ने बुधवार को डीसी को ज्ञापन सौंपा. जिसमें ग्रामीणों ने बरहरवा अंचल अंतर्गत मौजा श्रीकुंड थाना नं-8, जनं-206, दाग नं-153, रकवा 2 की जमीन जो सर्वे खतियान में सरकारी तालाब के नाम पर दर्ज है. उसके चारों ओर स्थायी आवास है एवं ग्रामीण उक्त तालाब का उपयोग करते हैं. पूर्व विधायक अकील अख्तर द्वारा तालाब में अनाधिकृत रूप से मिट्टी भर कर अवैध भवन निर्माण कार्य किया जा रहा था. जिसको लेकर ग्रामीणों ने संबंधित सभी पदाधिकारी को जानकारी दी तथा निर्माण कार्य को रोकने तथा फिर से तलाब का स्वरूप यथास्थिति बहाल करने की मांग की. वर्तमान में निर्माण कार्य तो रुका हुआ है लेकिन तालाब की मिट्टी नहीं हटायी गयी है. ग्रामीणों ने कहा तालाब को पूर्व विधायक अकील अख्तर द्वारा पैसा के बल पर मिट्टी भर कर अवैध भवन निर्माण कार्य कराना नियम के विरुद्ध है एवं सरकारी जमीन को हड़पने की भी मंशा है. ग्रामीणों ने तालाब का स्वरूप बनाने रखने के संदर्भ में डीसी से कार्रवाई की मांग की है.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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