ओके... मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम होगा हाइटेक

– पहले राउंड में 148 एएनएम रजिस्टर्ड – बढ़ेगी एएनएम की जिम्मेदारी, मरीज को मिलेगा लाभसाहिबगंज . जच्चा-बच्चा के बेहतर सेहत व मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम हाइटेक होने जा रहा है. डॉ पीपी पांडे ने बताया कि इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है. दरअसल अस्पतालों […]

– पहले राउंड में 148 एएनएम रजिस्टर्ड – बढ़ेगी एएनएम की जिम्मेदारी, मरीज को मिलेगा लाभसाहिबगंज . जच्चा-बच्चा के बेहतर सेहत व मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम हाइटेक होने जा रहा है. डॉ पीपी पांडे ने बताया कि इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है. दरअसल अस्पतालों में भरती मातृ व शिशु की सुचारु सेवा की जवाबदेही एएनएम की होती है. प्रसव पूर्व जांच से लेकर टीकाकरण व अन्य सेवा देने के बाद इन्हें इसकी रिपोर्ट कागजों के माध्यम से विभाग को उपलब्ध करानी पड़ती थी. लेकिन एएनएम को अब इस झंझट से मुक्ति मिल जायेगी. एएनएम अब मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के तहत दी जाने वाली सेवा को किसी भी मोबाइल के माध्यम से अपडेट कर सकेेंगी.148 एएनएम हुई रजिस्टर्ड :यूएसएसडी के तहत जिला की कुल 275 एएनएम में 148 को रजिस्टर्ड किया गया है. बाकी अन्य एएनएम भी सर्विस प्रोवाइडर के साथ विभाग का टाइअप होने पर इस व्यवस्था से जुडे़गी. डीडीएम धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि यह सेवा बीएसएनएल, एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया व टाटा से लिया जा रहा है.मरीज को होगा लाभ: इस नयी व्यवस्था से मरीज को भी लाभ पहुंचेगा. सिविल सर्जन डॉ बी मरांडी ने बताया कि रजिस्टर्ड एएनएम द्वारा सेवा का डाटा भेजने के बाद इन्हें अगली सेवा के लिए सूचना भेजी जायेगी. ऐसे में एएनएम मरीज के प्रति ज्यादा सचेत रहेगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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