मिर्जाचौकी में 11 स्टोन क्रेशर सील

मंडरो : तैयार स्टोन चिप्स व पत्थरों को किया जब्त – मंडरो प्रखंड में चलता है 260 से 300 अवैध क्रशर मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र के पहाड़पुर मौजा अंतर्गत नयानगर गांव के अवैध रूप से चलाये जा रहे 11 स्टोन क्रशरों को डीसी के निर्देश पर जिला खनन पदाधिकारी फेकू राम व खनन इंस्पेक्टर आशीष कुमार […]

मंडरो : तैयार स्टोन चिप्स व पत्थरों को किया जब्त – मंडरो प्रखंड में चलता है 260 से 300 अवैध क्रशर मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र के पहाड़पुर मौजा अंतर्गत नयानगर गांव के अवैध रूप से चलाये जा रहे 11 स्टोन क्रशरों को डीसी के निर्देश पर जिला खनन पदाधिकारी फेकू राम व खनन इंस्पेक्टर आशीष कुमार काक ने रविवार को सील कर दिया. साथ ही सभी स्टोन क्रशरों पर तैयार किया गया स्टोन चिप्स व पत्थरों को जब्त किया हैं.

मंडरो प्रखंड में चार नंबर खदान नयानगर, मंडरो, भगैया, तेतरिया, गौरीपुर, कीर्तिनियां के समीप आदि क्षेत्रों में वैध व अवैध रूप से 260 से 300 क्रशर चल रहे हैं, जिसमें कई लोगों के पास लाइसेंस नहीं है. इधर डीएमओ की जांच की सूचना मिलते ही अधिकांश क्रशर मालिक बंद कर भाग हुए. सील होने से अवैध रूप से चलाने वाले क्रशर मालिको में हड़कंप है. ‘ ये सारे स्टोन क्रशर प्रदूषण विभाग का एनओसी एवं बिना लाइसेंस के चलाये जा रहे थे. सभी क्रशर मालिकों पर खनिज विक्रेता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जायेगी.

इस अभियान आगे भी जारी रखते हुए और भी क्रशरों को सील किया जायेगा. अवैध रूप से क्रशर चलाये जाने के कारण पहाड़ों के अस्तित्व को मिटाया जा रहा है. साथ ही करोड़ों की राजस्व की चोरी की जा रही है. – फेकू राम, जिला खनन पदाधिकारी, साहिबगंज इनका क्रशर हुआ सील मो हलीम के दो , मो मैनुद्दीन, अरुण पांडे, अमरदीप साह, मो निजाम, संजय चौधरी, परशुराम, मो निजामुद्दीन, बबलू कुमार व एक अन्य व्यक्ति का क्रशर सील किया गया है. फोटों नं 15 एसबीजी 18,19 हैं. कैप्सन: रविवार को जांच करते खनन पदाधिकारी क्रेशर सील करते कर्मी

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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