ओके.... जिला क्रिकेट लीग पर साहिबगंज वेल्चर का कब्जा

प्रतिनिधि, साहिबगंजशहर के पुलिस लाइन मैदान में शनिवार को जिला क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जिला क्रिकेट लीग का फाइनल मैच खेला गया. इसमें साहिबगंज वेल्चर टीम व वेल्चर बी टीम के बीच मुकाबला हुआ. जिसमें साहिबगंज वेल्चर के 89 रन से विजयी होने पर प्रशिक्षु डीएसपी ने ट्रॉफी देकर उन्हें सम्मानित किया. मैच में […]

प्रतिनिधि, साहिबगंजशहर के पुलिस लाइन मैदान में शनिवार को जिला क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जिला क्रिकेट लीग का फाइनल मैच खेला गया. इसमें साहिबगंज वेल्चर टीम व वेल्चर बी टीम के बीच मुकाबला हुआ. जिसमें साहिबगंज वेल्चर के 89 रन से विजयी होने पर प्रशिक्षु डीएसपी ने ट्रॉफी देकर उन्हें सम्मानित किया. मैच में टीम साहिबगंज वेल्चर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 24 ओवर में 10 विकेट खोकर कुल 212 रन बनाये. इसमें बल्लेबाज विजय भारती 60 रन व विवेकानंद ने 48 रन बनाये. जबकि बेहतर गेंदबाजी करते हुए श्रवण कुमार ने चार विकेट लिया. वहीं लक्ष्य का पीछा करते हुए वेल्चर ब्लू बी टीम महज 123 रन पर ऑल आउट हो गयी. इसमें विनय ने 32 रन व विष्णु ने 21 रन बनाये. जबकि गेंदबाजी कर रहे राहुल ने चार व विनय ने दो विकेट लिये. मैच में एंपायर की भूमिका में रिजवान और बाबू खान थे. मौके पर एसोसिएशन के चंदेश्वर प्रसाद सिन्हा, डॉ विजय कुमार, डॉ नंदकिशोर प्रसाद, डॉ तुफैल, सतीश कुमार, संतोष सिंह, बलराम दास आदि उपस्थित थे. ……………………………… फोटो नंबर 14 एसबीजी 22 हैकैप्सन: शनिवार को विजेता टीम को पुरस्कार देते प्रशिक्षु डीएसपी व अन्य

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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