डीएमओ व थाना प्रभारी ने घटना स्थल की जांच

भूताहा पहाड़ के खदान को बंद करने का निर्देशफोटों नं 14 एसबीजी 19,20 हैं.कैप्सन: शनिवार को निरीक्षण करते डीएमओ व अन्यइनसेट मे घायल प्रतिनिधि, मंडरोमिर्जाचौकी थाना क्षेत्र के भूताहा पहाड़ पर शुक्रवार को हुई खदान दुर्घटना को लेकर शनिवार को जिला खनन पदाधिकारी फेंकू राम, खनन इंस्पैक्टर आशीष कुमार काक व मिर्जाचौकी थाना प्रभारी सुशील […]

भूताहा पहाड़ के खदान को बंद करने का निर्देशफोटों नं 14 एसबीजी 19,20 हैं.कैप्सन: शनिवार को निरीक्षण करते डीएमओ व अन्यइनसेट मे घायल प्रतिनिधि, मंडरोमिर्जाचौकी थाना क्षेत्र के भूताहा पहाड़ पर शुक्रवार को हुई खदान दुर्घटना को लेकर शनिवार को जिला खनन पदाधिकारी फेंकू राम, खनन इंस्पैक्टर आशीष कुमार काक व मिर्जाचौकी थाना प्रभारी सुशील कुमार घटना का जायजा लिया. इनलोगों ने आसपास के मजदूर रंजय कुमार, नवीन कुमार, मो जाकीर सहित अन्य से पूछताछ की. इन लोगों ने बताया कि जब पहाड़ का मलवा गिरा उस समय पोपलेन चालक मनोज यादव पोपलेन के करीब था. पहाड़ का धंसान देखकर पोपलेन चालक भाग गया. भागने के क्रम में पोपलेन चालक मनोज यादव को हल्की चोटें आयी. इधर, जांच करने पहुंचे खनन पदाधिकारी फेंकू राम ने जांच होने तक तत्काल पट्टाधारी को खदान बंद करने का निर्देश दिया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

लोक अदालत न्याय व्यवस्था को बनाता है सरल व सुलभ : पीडीजे

कैसा लग रहा सर” कह ग्रामीणों ने डीसी को दिखायी जर्जर सड़क

साहिबगंज के लाल अमन ने किया कमाल, आईएफएस में 27 रैंक लाकर किया नाम रौशन

टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

यह भी पढ़ें >