लोक अदालत में 291 मामले निष्पादित

78 लाख 73 हजार 983 रुपये की हुई वसूलीसंवाददाता, साहिबगंजमर्यादित ढंग से ऋण चुकाये, अन्यथा नीलाम पत्र निर्गत होने पर गिरफ्तारी होगी. यह बातें शनिवार को न्यायालय भवन में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडे ने कही. इस अवसर पर छह बेच […]

78 लाख 73 हजार 983 रुपये की हुई वसूलीसंवाददाता, साहिबगंजमर्यादित ढंग से ऋण चुकाये, अन्यथा नीलाम पत्र निर्गत होने पर गिरफ्तारी होगी. यह बातें शनिवार को न्यायालय भवन में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडे ने कही. इस अवसर पर छह बेच के माध्यम से विभिन्न बैंकों से संबंधित कुल 291 मामलों का निष्पादन किया गया. 78 लाख 73 हजार 983 रुपये राजस्व की वसूली की गयी. श्री पांडे ने उपभोक्ताओं को समय पर विभिन्न प्रकार के सरकारी टैक्स को चुकाने की नसीहत दी.जिला जज प्रथम रामबच्चन सिंह ने बताया कि ऋण की अदायगी कर देश के विकास में सहभागी बनें. प्रत्येक महीना के दूसरे शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजन किया जायेगा. बैंक का ऋण सरकारी पैसा नहीं होता है . जनता के जमा पैसों से ही ऋण दिया जाता हैं. उसे समय पर लौटाये.स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष कुमार विजय सिंह ने कहा कि जन उपयोगी समस्या का निदान के लिये लोक अदालत का दरवाजा खटखटाये. एसबीआइ के एडीएम सुधांशु शेखर वर्मा ने अदालत की लंबी व जटिल समस्या से बचते हुए नेशनल लोक अदालत के सरल प्रक्रिया को अपना कर मुकदमें से छुटकारा पाने की नसीहत दी. इस अवसर पर राजीव कुमार सिन्हा, अजय कुमार श्रीवास्तव, सचिव सुभाष, आभाष वर्मा, बच्चन प्रसाद श्रीवास्तव, पीके मिश्रा, सुमित प्रकाश, सचिव विजय कर्ण, प्रशिक्षु डीएसपी आदि थे………फोटों नं 14 एसबीजी 3 व 4 हैं.कैप्सन: शनिवार को अदालत को संबोधित करते मुख्य अतिथि उपस्थित लोग

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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