ओके::फ्लैग-ऋण माफ होने के बावजूद नोटिस भेजने का आरोप लगाया

-बैंक प्रबंधक ने कहा, नहीं माफ हुआ ऋण-सभी को किस्त में जमा करनी होगी राशिसंवाददाता, साहिबगंजसाहिबगंज व्यवहार न्यायालय में शनिवार को लोक अदालत का आयोजन किया गया. इस मौके पर आये कुछ किसानों ने जमकर हंगामा मचाया. जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड के गोपालपुल, हाजीपुर, पिलरटोला, बोरियो, बरहेट व अन्य क्षेत्रों से आये किसानों ने […]

-बैंक प्रबंधक ने कहा, नहीं माफ हुआ ऋण-सभी को किस्त में जमा करनी होगी राशिसंवाददाता, साहिबगंजसाहिबगंज व्यवहार न्यायालय में शनिवार को लोक अदालत का आयोजन किया गया. इस मौके पर आये कुछ किसानों ने जमकर हंगामा मचाया. जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड के गोपालपुल, हाजीपुर, पिलरटोला, बोरियो, बरहेट व अन्य क्षेत्रों से आये किसानों ने बताया कि वर्ष 2007 में बीपीएल के तहत दो-दो गाय 40 हजार रुपये में तथा दो-दो बकरी 10 हजार रुपये में ऋण के तहत दिया गया था. बाद में सरकार द्वारा ऋण माफ कर दिया गया था. वहीं अदालत द्वारा 60 से 70 हजार रुपये बकाया का नोटिस भेजा गया है. कई लोग तो कई किस्तों में पैसा भी जमा कर चुके हैं. लेकिन अदालत यह नहीं मान रही है. लाभुकों ने बताया कि ऋण माफ करने की बात कही गयी थी. किसानों में फनक चौधरी, गुरुदेव चौधरी, गुमराज चौधरी, सदानंद चौधरी, लक्ष्मण चौधरी, देवमुनिया देवी, मंटू चौधरी, सुरेश चौधरी, सत्यनारायण चौधरी, हीरालाल चौधरी, दशरथ चौधरी, नारद चौधरी, नारायण चौधरी, रामचरित चौधरी, बीरबल चौधरी मौजूद थे. वहीं मामले में लीड बैंक मैनेजर सुधांशु वर्मा ने कहा कि पैसा माफ नहीं किया गया है. मामले की जांच की जा रही है. सभी लोगों को किस्त में राशि जमा करनी होगी. ——————————————————–फोटों नं 14 एसबीजी 12 हैं.कैप्सन: शनिवार को विरोध करते ग्रामीण

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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